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अदालती आदेश न मानने पर एम्स निदेशक को नोटिस

Wed, 03 Feb 2016 09:55 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, नई दिल्ली
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अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) के निदेशक डॉ. एमसी मिश्रा के खिलाफ सेंट्रल एडमिनिस्ट्रेटिव ट्रिब्यूनल (कैट) ने न्यायालय की अवमानना का नोटिस जारी किया है।
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नोटिस जारी कर कैट ने पूछा है की क्यों नहीं आप पर अदालती अवमानना का मुकदमा चलाया जाए। एम्स निदेशक को सुनवाई पर अदालत में पेश होने के आदेश दिए गए हैं। इस संबंध में एम्स द्वारा बयान जारी कर कहा गया कि अदालत के आदेश का पालन किया जाएगा, इसे पूरा करने के लिए समय की मांग की जाएगी।

कर्मियों द्वारा दायर अवमानना की अर्जी पर सुनवाई करते हुए कैट ने एम्स निदेशक को नोटिस  जारी करने के साथ 14 मार्च को अदालत में पेश होने का आदेश दिया। एम्स कर्मियों द्वारा दाखिल याचिका में कहा गया कि स्टैंडिंग फाइनेंस कमेटी और गवर्निंग बॉडी से पास होने के बाद भी एम्स में कार्यरत निजी सचिव को समान नहीं किया गया जबकि पांचवे वेतन आयोग तक समान मिलता था।
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कैट ने एम्स को जुलाई 2015 में एम्स में कार्यरत निजी सचिव और निजी सहायक को भी उतना ही वेतन दिया जाए जितना कि केंद्रीय सचिवालय में कार्यरत निजी सचिव व निजी सहायक को मिलता है। क्यों कि पांचवें वेतन आयोग में दोनों को समान वेतन व भत्ते मिलते थे। आदेश के छह माह के उसे लागू न किए जाने पर कैट में अवमानना याचिका दायर की गई थी।

एम्स के मुताबिक अवमानना नोटिस मिलने के बाद एम्स द्वारा जारी बयान में कहा गया है कि कैट ने जो आदेश दिया है उसे पूरा करने के लिए एम्स काम कर रहा है। कर्मियों के वेतन और एरियर से 2.28 करोड़ रुपये का बोझ पड़ेगा। केंद्रीय स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय इस मसले को देख रहा है। यही नहीं इस मामले में वित्त मंत्रालय और कानून मंत्रालय से भी सलाह ली जा रही है। कैट के आदेश का पालन कराने के लिए अगली सुनवाई में एम्स की ओर से कैट से थोड़ा और समय मांगा जाएगा।
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