नई दिल्ली। पटियाला हाउस कोर्ट ने 10 नवंबर 2025 को लाल किले के पास हुए भीषण कार बम विस्फोट मामले में राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) को जांच पूरी करने और चार्जशीट दाखिल करने के लिए 45 दिन का अतिरिक्त समय दिया है। एनआईए ने 90 दिन की मोहलत मांगी थी, लेकिन अदालत ने केवल आधा समय मंजूर किया। इस विस्फोट में 11 से 15 लोगों की मौत हुई थी और कई अन्य घायल हुए थे। यह घटना दिल्ली में पहली कार-बोर्न सुसाइड बॉम्बिंग के रूप में जानी जा रही है। अदालत ने मामले में गिरफ्तार सात आरोपियों की न्यायिक हिरासत भी 13 मार्च 2026 तक बढ़ा दी है।
सुनवाई में शोएब नामक आरोपी को अदालत में पेश किया गया, जबकि अन्य छह आरोपितों को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए पेश किया। पटियाला हाउस कोर्ट के प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश पीतांबर दत्त ने एनआईए की याचिका पर फैसला सुनाते हुए आरोपियों के वित्तीय लेन-देन, डिजिटल रिकॉर्ड और आपसी संबंधों की गहन जांच के आधार पर यह अतिरिक्त समय दिया। एनआईए ने अब तक इस मामले में नौ आरोपियों को गिरफ्तार किया है। हाल ही में गिरफ्तार यासिर अहमद डार (शोपियां, जम्मू-कश्मीर निवासी) को पकड़ा गया था। एजेंसी का दावा है कि डार ने विस्फोट की साजिश में सक्रिय भूमिका निभाई और मृत हमलावर डॉ. उमर उन नबी तथा मुफ्ती इरफान से जुड़ा था। इसी तरह, बारामूला निवासी डॉ. बिलाल नसीर मल्ला (आठवां आरोपी) को 9 दिसंबर को गिरफ्तार किया था। जांच में पता चला कि उसने मुख्य आरोपी को लॉजिस्टिक सहायता दी और सबूत नष्ट करने में मदद की। अदालत ने पहले भी डार से 10 दिन की अतिरिक्त पूछताछ और मल्ला की हिरासत बढ़ाने की अनुमति दी थी।