बीपीएल मरीजों को बीके में कैसा इलाज मिलता है, इसका एक उदाहरण शनिवार को देखने को मिला। एक पीड़ित के पास लाल कार्ड होने के बाद भी उसे 18 घंटे तक इलाज नहीं मिला। किसी ने मामले की शिकायत स्वास्थ्य मुख्यालय को कर दी। इसके बाद सिविल सर्जन के हस्तक्षेप से उसे दोपहर बाद इलाज मिला।
भारत कॉलोनी निवासी सुरेश ने बताया कि उसके पिता चिरंजीलाल को हरनिया की परेशानी है। शुक्रवार देर रात तबीयत खराब होने के कारण वह अपने पिता को बीके अस्पताल की इमरजेंसी में ले आया। लेकिन, यहां आने के बाद किसी डॉक्टर ने उसकी सुध नहीं ली। शनिवार दोपहर तक इलाज न मिलता देख उसने शिकायत के लिए अधिकारियों से संपर्क करना शुरू किया।
बाद में मामले की शिकायत मुख्यालय को की गई। इस पर अस्पताल में हड़कंप मच गया। सिविल सर्जन डॉ. गुलशन अरोड़ा ने बताया कि मामले की सूचना मिलने के बाद पीड़ित पक्ष को इलाज मुहैया करवाया गया। ऐसा दोबारा न हो, इसके लिए अस्पताल अधिकारियों के साथ सोमवार को बैठक की जाएगी।