एफआईआर के लिए सुप्रीम कोर्ट में याचिका
सुप्रीम कोर्ट में तीन वकीलों मैथ्यूज जे नेदुम्परा, हेमाली सुरेश कुर्ने व राजेश विष्णु आद्रेकर और चार्टर्ड अकाउंटेंट मंशा निमेश मेहता ने याचिका दायर कर जस्टिस वर्मा के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने की मांग की है।
याचिका में सीजेआई की जांच समिति को चुनौती दी है। कहा है, भारतीय न्याय संहिता के तहत इस घटना में विभिन्न संज्ञेय अपराध हुए हैं। जांच का निर्णय निरर्थक है, क्योंकि कॉलेजियम खुद को ऐसा आदेश देने का अधिकार नहीं दे सकता। न्यायाधीशों को आपराधिक अभियोजन से दी गई छूट को भी चुनौती दी गई है।
समिति के फैसले बाद ही कोई निर्णय: धनखड़
न्यायिक जवाबदेही के मुद्दे पर राज्यसभा के सभापति व उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ ने सदन के नेता जेपी नड्डा और नेता विपक्ष मल्लिकार्जुन खरगे के साथ बैठक की। धनखड़ ने कहा, जस्टिस वर्मा मामले में कोई भी निर्णय करने से पहले सीजेआई की ओर से गठित समिति के फैसले का इंतजार करेंगे। धनखड़ ने सीजेआई की ओर से उठाए कदमों की तारीफ की। कहा, उन्होंने बेहद असरदार व पारदर्शी तरीके से मामले में कार्रवाई शुरू की है।
फैसलों की समीक्षा हो, महाभियोग चलाएं: बार
जस्टिस वर्मा के तबादले की सिफारिश से खफा इलाहाबाद हाईकोर्ट बार एसोसिएशन ने सोमवार को सांकेतिक विरोध जताया, फिर न्यायिक कार्य नहीं किया। बार अध्यक्ष अनिल तिवारी ने कहा, मंगलवार से बेमियादी हड़ताल शुरू की जाएगी। हमने लखनऊ बार से भी ऐसा ही करने का आग्रह किया है।
तिवारी ने कहा, सीजेआई से आग्रह किया है कि जस्टिस वर्मा को इलाहाबाद या कहीं और ट्रांसफर न किया जाए क्योंकि कोई भी कोर्ट कूड़ाघर नहीं है। उन्हें जांच पूरी होने तक कड़ी निगरानी में दिल्ली रहना चाहिए। उनके सभी फैसलों की गहन समीक्षा की जानी चाहिए। उनके खिलाफ महाभियोग शुरू करना चाहिए।
तिवारी ने कहा, सीजेआई से यह भी अनुरोध है कि वे सीबीआई व ईडी को एफआईआर दर्ज करने की अनुमति दें। हमने अंकल जज सिंड्रोम का मुद्दा भी उठाया है। जिन न्यायाधीशों के परिजन हाईकोर्ट में प्रैक्टिस कर रहे हैं, तो उन्हें उसी हाईकोर्ट में नहीं लगाना चाहिए, ताकि जनता का विश्वास बना रहे और पारदर्शिता सुनिश्चित हो सके।
विपक्षी सांसदों ने की महाभियोग चलाने की मांग
विपक्षी सांसदों ने जस्टिस वर्मा के खिलाफ निष्पक्ष जांच कराने और इस मुद्दे पर संसद में चर्चा कराने की मांग की है। तृणमूल कांग्रेस के सांसद कल्याण बनर्जी और भाकपा सांसद पी संदोष कुमार ने कहा, अगर जस्टिस वर्मा खुद इस्तीफा नहीं देते हैं, तो महाभियोग की कार्यवाही शुरू की जानी चाहिए। विपक्षी सांसदों ने सरकार से संसद में बयान देने को भी कहा है। साथ ही, जजों की नियुक्ति के लिए अन्य सरकारी पदों की तरह परीक्षाएं करने का सुझाव दिया।