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दिल्लीः श्रीराम बारात पर मंदी की मार, रामलीला में पुरानी पोशाक पहनेंगे कलाकार

Fri, 20 Sep 2019 05:51 AM IST
दुष्यंत शर्मा अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली
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रामलीला में खर्च होगा कम - फोटो : अमर उजाला
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दिल्ली की रामलीलाओं का राष्ट्रीय-अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रदर्शन होता है। हर बार लाखों रुपये इसके आयोजन में लगते हैं, लेकिन इस बार मंदी के असर ने इन रामलीलाओं का स्वरूप इतना छोटा कर दिया है कि आने वाले दिनों में लोगों को निराशा हाथ लग सकती है। 

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श्रीराम बारात के दर्शन के लिए लोग हर वर्ष उत्सुक रहते हैं, परंतु इस बार मंदी के चलते आगामी एक अक्तूबर को दिल्ली की सड़कों पर छोटी बारात के दर्शन होंगे। वहीं, चितरंजन पार्क में हर वर्ष होने वाली दुर्गा पूजा पर भी इस बार मंदी की मार है। यहां ओएनजीसी और गेल जैसी कंपनियों से करीब एक-एक लाख रुपये का चंदा मिलता था, जो अभी तक नहीं मिला।

लालकिला स्थित लवकुश रामलीला कमेटी के सचिव अर्जुन कपूर का कहना है कि मंदी का असर होने के कारण इस बार मिनी राम बारात निकाली जाएगी। हर वर्ष बारात में करीब 30 से ज्यादा झांकियां होती थीं, लेकिन इस बार 15 झांकी ही दिखाई देंगी। इतना ही नहीं, इस बार कलाकारों को पुरानी पोशाक से ही काम चलाना पड़ेगा।
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हर बार अलग-अलग रामलीला आयोजकों की ओर से अलग-अलग डिजाइनरों को विशेष ऑर्डर दिए जाते हैं, लेकिन पुरानी दिल्ली के मशहूर डिजाइनर सुमित गुप्ता का कहना है कि उनके पास केवल 30 फीसदी पोशाक नई बनाने का ऑर्डर आया है। लालकिले की अधिकांश रामलीला में वे ही पोशाक बनाते हैं। 

चितरंजन पार्क स्थित सीआर पार्क काली मंदिर समिति के सचिव श्रीवाश भट्टाचार्य का कहना है कि वे लोग ओएनजीसी सहित बड़ी कंपनियों से चंदा लेने का प्रयास कर रहे हैं। ये कंपनियां हर वर्ष एक लाख रुपये से भी ज्यादा का चंदा देती थीं, लेकिन इस बार क्या होगा? ये उन्हें भी नहीं पता। 

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राष्ट्रपति से लेकर प्रधानमंत्री तक पहुंचते हैं यहां

लालकिले की रामलीलाओं में राष्ट्रपति से लेकर प्रधानमंत्री तक पहुंचते हैं। पिछले वर्ष दिल्ली भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष मनोज तिवारी और केंद्रीय मंत्री डॉ. हर्षवर्धन ने भी यहां बतौर कलाकार के रूप में मंचन किया था। वीवीआईपी रामलीला होने के चलते आयोजक भी हर बार नई पोशाकें तैयार कराते हैं और झांकियां भी ज्यादा रखते हैं। प्रत्येक रामलीला के आयोजकों का आपस में प्रतियोगिता भी होती है। मंदी के असर के कारण हर आयोजक प्रतियोगिता करने से भी घबरा रहे हैं।

दानवीरों के पास नहीं है कैश
रामलीला आयोजकों के दानवीरों के पास मंदी के चलते कैश नहीं है। बाजार में जब वे चंदा के लिए पहुंच रहे हैं तो व्यापारी भी अपनी हालत बयां कर रहे हैं। कैश नहीं होने के कारण कई बड़े व्यापारी बैंक खाते में ट्रांसफर या चैक देने की बात कर रहे हैं, लेकिन टैक्स की मार के चलते आयोजक इससे परहेज कर रहे हैं। अशोक विहार फेज-2 स्थित श्रीआदर्श रामलीला कमेटी के प्रचार अध्यक्ष प्रवीण कुमार सिंह बताते हैं कि उनकी रामलीला का बाकायदा पेनकार्ड भी है और टैक्स भी देते हैं। इसलिए उनकी रामलीला को दान देने वालों की दिक्कत नहीं है, लेकिन वे मानते हैं कि दिल्ली में ज्यादातर रामलीला आयोजक टैक्स नहीं देते हैं। धार्मिक कार्यक्रम होने के चलते वे इससे दूर ही रहते हैं। 

विश्वास नगर में सीटें आधी
पूर्वी दिल्ली के विश्वास नगर इलाके में हर वर्ष होने वाली रामलीला में इस बार केवल 5 हजार दर्शकों की क्षमता युक्त पंडाल होगा, जबकि पिछले वर्ष यहां 10 हजार दर्शकों के एक साथ बैठने की क्षमता थी। आयोजकों के अनुसार, पिछले वर्ष जिसने 51 हजार रुपये का चंदा दिया अब वह व्यापारी 11 और 21 हजार रुपये तक ही दे रहा है।
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