लालकिले की रामलीलाओं में राष्ट्रपति से लेकर प्रधानमंत्री तक पहुंचते हैं। पिछले वर्ष दिल्ली भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष मनोज तिवारी और केंद्रीय मंत्री डॉ. हर्षवर्धन ने भी यहां बतौर कलाकार के रूप में मंचन किया था। वीवीआईपी रामलीला होने के चलते आयोजक भी हर बार नई पोशाकें तैयार कराते हैं और झांकियां भी ज्यादा रखते हैं। प्रत्येक रामलीला के आयोजकों का आपस में प्रतियोगिता भी होती है। मंदी के असर के कारण हर आयोजक प्रतियोगिता करने से भी घबरा रहे हैं।
दानवीरों के पास नहीं है कैश
रामलीला आयोजकों के दानवीरों के पास मंदी के चलते कैश नहीं है। बाजार में जब वे चंदा के लिए पहुंच रहे हैं तो व्यापारी भी अपनी हालत बयां कर रहे हैं। कैश नहीं होने के कारण कई बड़े व्यापारी बैंक खाते में ट्रांसफर या चैक देने की बात कर रहे हैं, लेकिन टैक्स की मार के चलते आयोजक इससे परहेज कर रहे हैं। अशोक विहार फेज-2 स्थित श्रीआदर्श रामलीला कमेटी के प्रचार अध्यक्ष प्रवीण कुमार सिंह बताते हैं कि उनकी रामलीला का बाकायदा पेनकार्ड भी है और टैक्स भी देते हैं। इसलिए उनकी रामलीला को दान देने वालों की दिक्कत नहीं है, लेकिन वे मानते हैं कि दिल्ली में ज्यादातर रामलीला आयोजक टैक्स नहीं देते हैं। धार्मिक कार्यक्रम होने के चलते वे इससे दूर ही रहते हैं।
विश्वास नगर में सीटें आधी
पूर्वी दिल्ली के विश्वास नगर इलाके में हर वर्ष होने वाली रामलीला में इस बार केवल 5 हजार दर्शकों की क्षमता युक्त पंडाल होगा, जबकि पिछले वर्ष यहां 10 हजार दर्शकों के एक साथ बैठने की क्षमता थी। आयोजकों के अनुसार, पिछले वर्ष जिसने 51 हजार रुपये का चंदा दिया अब वह व्यापारी 11 और 21 हजार रुपये तक ही दे रहा है।