नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) ने हरियाणा शहरी विकास प्राधिकरण (हुडा) और गुड़गांव नगर निगम को अरावली वन्य क्षेत्र में कूड़ा-कचरा फेंकने और ढेर जमा करने के लिए फटकार लगाई है। ग्रीन बेंच ने प्राधिकरणों को सख्ती के साथ कहा है कि वह वन्य क्षेत्र में किसी भी प्रकार से किसी तरह का कूड़ा-कचरा न जमा होने दें।
वहीं, अपने निर्देश में ग्रीन बेंच ने दोनों ही प्राधिकरणों को कारण बताओ नोटिस देते हुए पूछा है कि आखिर क्यों न एनजीटी एक्ट, 2010 के अधीन धारा (16) और (17) के तहत आप लोगों पर पर्यावरणीय जुर्माना लगाया जाए। मामले की अगली सुनवाई 22 फरवरी को होगी।
जस्टिस स्वतंत्र कुमार की अध्यक्षता वाली बेंच ने शुक्रवार को मामले पर सुनवाई की। बेंच का यह निर्देश पर्यावरणविद और याची विवेक कंबोज की याचिका पर सुनवाई के बाद आया है। ग्रीन बेंच ने कहा कि प्राधिकरण तय करें कि सिर्फ तय की गई साइट पर ही कूड़ा-कचरा डंप किया जाए।
याचिका में हुडा और गुड़गांव व फरीदाबाद नगर निगम पर आरोप था कि वह औद्योगिक कचरे के साथ निर्माण मलबा और अन्य कचरा गुड़गांव-फरीदाबाद के वन्य क्षेत्र में डंप कर रहा है।
याची ने 17 जनवरी को गौर किया था कि दोनों ही प्राधिकरणों के जरिये वन्य क्षेत्र में कूड़ा-कचरा और मलबा डंप किया जा रहा है। वहीं याची की ओर से पेश एडवोकेट राहुल चौधरी ने कहा कि न सिर्फ कूड़ा वन्य क्षेत्रों में फेंका जा रहा है बल्कि मशीनों की सहायता से भी अन्य कूड़ा वन्य क्षेत्र में फेंका जा रहा है।
याची ने आरोप लगाया कि इस संबंध में आपित्त भी दर्ज की गई थी। हालांकि इसके बावजूद भी प्राधिकरणों ने डंपिंग बंद नहीं की। याची ने बेंच के समक्ष कूड़े के ढेर और ट्रैक्टर इत्यादि के संबंध में तस्वीरें भी पेश कीं। इसके अलावा स्थानीय मीडिया रिपोर्ट भी पेश की गईं। इसमें हुडा और निगम को हर रविवार को कूड़ा फेंकने के लिए जिम्मेदार ठहराया गया है।