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उठा सच से पर्दा, क्यों भागा जंजीर से बंधा कैदी

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बीके अस्पताल जा रहे हैं तो सावधान। यहां मरीज, तीमारदार और उनके सामान की सुरक्षा के कोई इंतजाम नहीं हैं। मेन गेट से लेकर तीसरी मंजिल तक कहीं भी जाएं, सुरक्षा की कोई व्यवस्था नहीं है।
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इलाज के लिए आए कैदी तरुण आजाद के फरार होने के बाद ‘अमर उजाला’ ने अस्पताल की सुरक्षा व्यवस्था परखी, तो यह हकीकत सामने आई।

मुख्य दरवाजा : यहां एक भी सिपाही तैनात नहीं दिखा। हां, साइकिल स्टैंड वाले ने जरूर रस्सा लगा रखा है, लेकिन वह सुरक्षा के लिए नहीं, बल्कि बिना पर्ची कटाए जाने वाले वाहनों को रोकने के लिए है।

इमरजेंसी गेट पर कोई सुरक्षा नहीं, वार्ड में एक मरीज सिर पर पट्टी बांधे जाने के इंतजार में गंदे से बेड पर लेटा है। एक कोने में रखी इमरजेंसी दवाओं और सिरिंज को रिपोर्टर ने छुआ, लेकिन कोई पूछने वाला नहीं।
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ओपीडी छुट्टी होने की वजह से बंद, लेकिन मुख्य गेट खुला हुआ। कोई भी इस गेट से आराम से आ जा सकता है। यहां हॉल में एक सीसीटीवी कैमरा लगा है, लेकिन यह बंद गैलरी और रैंप की ओर की तस्वीर लेता है। यानी बाहर से आने जाने वालों के लिए इस कैमरे का इस्तेमाल नहीं होता।
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कैदी हथकड़ी खोलकर फरार हो गया

प्रथम तल : जच्चा बच्चा वार्ड और प्रसव कक्ष में कोई भी आ जा सकता है। कुछ बच्चे और एक महिला वार्ड में आराम से घूम रहे हैं, कोई रोक टोक नहीं। मालूम हो कि प्रसव कक्ष और जच्चा बच्चा वार्ड में पुरुषों का प्रवेश मना होता है।

तीसरा तल : यहीं कैदी वार्ड से शुक्रवार रात एक कैदी हथकड़ी खोलकर फरार हो गया था। यहां सिक्योरिटी तो क्या कोई स्टाफ भी नहीं दिखा। हां कैदी वार्ड में ताला डालने एक फोर्थ क्लास कर्मचारी जरूर आई।

अस्पताल में कोई भी व्यक्ति आपराधिक घटना कर आसानी से भाग सकता है, मरीज और तीमारदार का ही नहीं, बल्कि अस्पताल का भी सामान बेखौफ चोरी किया जा सकता है।

अराजक तत्व तीसरे तल पर बने हॉल का इस्तेमाल पनाह लेने के लिए कर सकते हैं। ऐसे हालात में मरीज और तीमारदारों को अपनी और अपने सामान की हिफाजत खुद ही करनी होगी।
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