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यहां होगी मोदी के ‘मेक इन इंडिया’ की असली परीक्षा

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प्रदेश की सबसे पुरानी औद्योगिक नगरी में उद्योगों के लिए वैध प्लॉटों का टोटा है। गैर औद्योगिक क्षेत्रों में काम करने वाले उद्योगों को सरकारी सहायता लेने में परेशानी आती है।
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नॉन कंफर्मिंग एरिया में चलने वाले उद्योगों का सरकार के पास डाटा ही नहीं है। उद्यमियों को आए दिन अवैध रूप से काम करने का ठप्पा लगने का डर सताता रहता है।

इतना ही नहीं सरकारी सुविधाएं मिलने में भी असुविधा होती है। आज तक इन उद्योगों का पंजीकरण भी नहीं हुआ। ऐसे में भला प्रधानमंत्री की मेक इन इंडिया मुहिम इस शहर में कैसे परवान चढ़ेगी।
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उद्यमियों को होने वाली परेशानी को देखते हुए आईएमएसएमई आफ इंडिया ने सरकार को नान कंफर्मिंग एरिया में चलने वाले उद्योगों का भी जन्म प्रमाणपत्र की तरह ही पंजीकरण करने की मांग की है।

औद्योगिक शहर में कुल करीब 20,000 उद्योग हैं। इनमे कितने रजिस्टर्ड हैं, इसका सही आंकड़ा किसी के पास नहीं। उद्यमी अमन ने बताया कि पहले ही इतना दबाव होता है।

ऐसे में काम को लेकर एकाग्रता नहीं हो पाती। अक्सर अवैध काम करने का ठप्पा लगने का डर बना रहता है। सरकार के पास तो इन फैक्ट्रियों का डाटा तक नहीं है। ऐसे में वह सुविधाएं क्या देंगे। जबकि वह लोग टैक्स भरते हैं।

उधर, आईएमएसएमई के प्रधान राजीव चावला ने कहा कि जैसे सड़क पर रहने वाले व्यक्ति का भी जन्म प्रमाणपत्र बनता है वैसे ही नान कंफर्मिंग एरिया में चल रहे उद्योगों का भी रजिस्ट्रेशन हो। जिससे उन्हें अवैध न बताया जा सके।

उन्होंने कहा कि इन कंपनियों में हजारों लोग काम करते हैं। वर्ल्ड क्लास गुणवत्ता के उत्पाद तैयार होते हैं, लेकिन सरकारी सहयोग नहीं मिलता इसलिए वे आगे नहीं बढ़ पा रहे हैं। ऐसे में सरकार को इस दिशा में पहल करनी चाहिए।
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इस समय वैध औद्योगिक क्षेत्र

सेक्टर-4, 6, 24, 25, 27, आईएमटी, सेक्टर-31, सेक्टर-58, 59 एवं डीएलएफ इंडस्ट्रियल एरिया। संजय गांधी मेमोरियल नगर, अपोजिट वाईएमसीए, न्यू डीएलएफ, कृष्णा कॉलोनी,  सरूरपुर, मुजेसर इंडस्ट्रियल एरिया, भाखड़ी इंडस्ट्रियल एरिया, इंदिरा कांप्लेक्स खेड़ी रोड, तीन-बी, जवाहर कॉलोनी, कारखाना बाग, एनआईटी एवं पाली आदि।

नॉन कंफर्मिंग में होने का नुकसान
अघोषित क्षेत्रों की कंपनियां फैक्ट्री एक्ट के तहत नहीं आतीं। इससे मजदूरों को सरकार की कल्याणकारी सुविधाएं नहीं मिल पातीं।

कंपनियों को लोन लेने में परेशानी होती है। कई तरह की सब्सिड़ी से वंचित होना पड़ता है।

अघोषित क्षेत्रों में विकास कार्य नहीं हो पाते जो कंपनियों के विकास में बड़ी बाधा है। विभिन्न विभागों के इंस्पेक्टर हमेशा डराकर ‘सुविधा शुल्क’ लेते रहते हैं।
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