डीबीटीएल योजना में गैस एजेंसियों के कर्मचारियों की गलती उपभोक्ताओं को भुगतनी पड़ रही है। एजेंसियों के पास बैंक अकाउंट से अपलिंक करने के लिए रोजाना सैकड़ा फार्म आ रहे हैं।
कर्मचारी जब अकाउंट नंबर कंप्यूटर पर फीड करते हैं तो जल्दबाजी में कुछ अकाउंट नंबर गलत फीड हो रहे हैं। इससे सब्सिडी की धनराशि दूसरे ग्राहक के अकाउंट में चली जाती है।
इससे ग्राहक परेशान होकर बैंक और गैस एजेंसी के चक्कर लगाता है। हालांकि पास बुक के माध्यम से बैंक प्रबंधन अकाउंट नंबर को सही कर देते हैं, लेकिन फिर भी ग्राहक को बेवजह परेशान होना पड़ता है।
गैस एजेंसी में ग्राहक जब अपने अकाउंट नंबर को बैंक से अपलिंक कराएं तो ध्यान रखें कि उनका खाता नंबर सही फीड हुआ है। बैंकों में ऐसे कई मामले आ रहे हैं, जिसमें फार्म में अकाउंट नंबर किसी और का होता है।
जबकि कंप्यूटर पर किसी अन्य ग्राहक का अकाउंट नंबर फीड रहता है। सब्सिडी की धनराशि उस अकाउंट में जाती है, जो कंप्यूटर में फीड रहता है। इस तरह से वास्तविक ग्राहक को सब्सिडी की धनराशि नहीं मिल पाती।
केस एक
लोहिया नगर निवासी निशा सैनी का आधार कार्ड और अकाउंट नंबर गलत फीड हो गया था। बुकिंग के बाद जब सब्सिडी की धनराशि अकाउंट में नहीं पहुंची तो निशा गैस एजेंसी पहुंची। पूरी जानकारी देने के बाद निशा को बैंक आकर अकाउंट नंबर सही कराना पड़ा।
केस दो
पटेल नगर निवासी महेश चंद गुप्ता के साथ भी यही हुआ। कंप्यूटर पर उनका दिया हुआ अकाउंट नंबर गलत फीड किया गया। बाद में गैस एजेंसी कर्मचारियों ने गलती मानते हुए बैंक से इसे ठीक कराया।