बिसरख में स्थापित शिवमंदिर दुनिया में एकमात्र है जिसे रावण व उसके परिवार ने मिलकर स्थापित किया था। रावण इसकी रोज पूजा करता था।
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25 से ज्यादा निकल चुके शिवलिंग
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बिसरख में रावण द्वारा स्थापित किया गया मंदिर
- फोटो : अमर उजाला
महाशिवरात्रि अन्य त्योहारों से ज्यादा महत्वपूर्ण माना जाता है। आज महाशिवरात्रि के दिन रावण द्वारा सदियों पहले स्थापित की गई अष्टभुजा शिवलिंग की पूजा की जाएगी। साथ ही रुद्राभिषेक के लिए भी खास तैयारियां की गई हैं। बता दें कि बिसरख ऋषि विसश्रवा की तपोस्थली है, जहां रावण का जन्म हुआ था। तब से बिसरख को शिव नगरी कहा जाता है। यहां पौराणिक काल की शिवलिंग है, जिसे रावण ने स्थापित किया था।
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दर्शन मात्र से ही पूरी होती इच्छा
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bisrakh temple
- फोटो : अमर उजाला
बाहर से देखने में इसकी उचाईं महज 2.5 फीट है, लेकिन जमीन के नीचे इसकी गहराई लगभग 8 फीट है। प्राचीन शिव मंदिर का निर्माण रावण के पिता विसश्रवा ने कराया था। त्रेता युग से यहां महाशिवरात्रि पर मेले का आयोजन किया जाता रहा है। जहां विदेशों से भी पर्यटक पहुंचते हैं।
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बिसरख में रावण द्वारा स्थापित किया गया मंदिर
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मंदिर के महंत अशोकानंद आचार्य ने बताया कि महाशिवरात्रि के इस मौके पर रुद्राभिषेक किया जाएगा। बिसरख धाम में रावण द्बारा स्थापित अष्टभुजी शिवलिंग विराजमान है, जो विश्व में दूसरा कहीं नही है। अशोकानंद ने बताया कि लंकापति रावण बाल्यकाल से ही शिव के भक्त थे।
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बिसरख में रावण द्वारा स्थापित किया गया मंदिर
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उन्होंने शिव की घोर उपासना की और शिव मंत्रावली की स्वयं रचना की। खास बात यह है कि जिस मंदिर में यह शिवलिंग स्थापित किया गया है, वहां पौराणिक काल की मूर्तियां भी बनी हुई हैं। मंदिर के गेट पर रावण के पिता व मां दोनों की मूर्ति स्थापित है।
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बिसरख में रावण द्वारा स्थापित किया गया मंदिर
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इस गांव से अब तक 25 से ज्यादा शिवलिंग मिले हैं, जिनमें से एक की गहराई इतनी है कि खुदाई के बाद भी उसका कहीं छोर नहीं मिला है। मंदिर के महंत रामदास ने बताया कि खुदाई के दौरान त्रेता युग के नरकंकाल, बर्तन और मूर्तियों के अलावा कई अवशेष पाए जा चुके हैं। महंत रामदास ने बताया कि महाशिवरात्रि के दिन यहां प्रतिवर्ष मेले का आयोजन किया जाता है। सुबह से ही दूरदराज के श्रद्धालु यहां जल चढ़ाने आते है। उनके लिए भंडारे की व्यवस्था भी की जाती है।
बिसरख में रावण द्वारा स्थापित किया गया मंदिर
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महंत रामदास ने बताया कि शिवलिंग के दर्शन मात्र से ही सभी कष्ट दूर हो जाते है। लिहाजा यहां हजारों की संख्या में श्रद्धालु पहुंचते हैं। यहां शिवरात्रि की पूजा के लिए महीनों पहले से तैयारी शुरू कर दी जाती है। शिवलिंग पर दूध बेलपत्र चढ़ाने लोग सुबह से आने लग जाते हैं।