दिल्ली में पांच मरीजों को जब अरजेंट ट्रांसप्लांट की जरूरत थी तब उनके लिए जिंदगी की किरण लेकर आई 22 साल के एक शख्स की मौत। जिसकी हाल ही में द्वारका में हुए एक रोड एक्सीडेंट में मौत हो गई और उसके परिवार ने उसके अंगदान करने का फैसला लिया।
विज्ञापन
इन अंगों में आंत (इंटेस्टाइन) भी शामिल था। मृतक शख्स के परिवार ने उसके अंग राजधानी के सरकारी अस्पताल सफदरजंग को दान करने का फैसला किया। जिसके बाद कुछ ऐसा हुआ जो अपने आप में एक रिकॉर्ड बन गया।
बता दें कि भारत में इंटेस्टाइन का प्रत्यारोपण बहुत ही कम अस्पतालों में होता है। यही कारण है कि 23 साल की गैंगरेप पीड़िता निर्भया को आंत के प्रत्यारोपण के लिए सिंगापुर ले जाना पड़ा था। भारत में आंत के प्रत्यारोपण के सफल होने के बहुत ही कम केस हैं।
विज्ञापन
पांच मरीजों को मिले अंग
आंत
- फोटो : सोशल मीडिया
स्वास्थ्य सेवाओं के डायरेक्टर जनरल डॉक्टर जगदीश प्रसाद ने बताया कि, हृदय, किडनी और लिवर का प्रत्यारोपण तो आम बात है, लेकिन यह पहला मौका था जब भारत के एक सराकरी अस्पताल में आंत का सफल प्रत्यारोपण हुआ हो। उन्होंने आगे कहा कि, मैं मृतक के परिवार को सलाम करता हूं कि उन्होंने अपने दुख को पीछे रखते हुए दूसरों को जीवन का दान देने की सोची।
बता दें कि अंगदान करने वाले शख्स का हृदय, लीवर और एक किडनी तो एम्स में प्रत्यारोपित हुआ लेकिन उसकी दूसरी किडनी और इंटेस्टाइन सफदरजंग और एक प्राइवेट अस्पताल में प्रत्यारोपित किए गए।
सफदरजंग अस्पताल में ट्रांसप्लांट कॉर्डिनेटर के पद पर कार्यरत संगीता शेरावत बताती हैं कि जिस शख्स के अंग दान किए गए उसने अपने माता-पिता को उस वक्त खो दिया था जब वह एक साल का भी नहीं था। उसके चाचा जो उत्तराखंड में रहते हैं उन्होंने ही उसकी परवरिश की।
जब ब्रेन डेड घोषित हुआ तब जाकर अंगदान के लिए माना परिवार
- फोटो : अमर उजाला
हाल ही में उसने सीआईएसएफ की नौकरी के लिए इंटरव्यू पास किया था और फरवरी में अपने रिश्तेदारों से मिलने द्वारका आया था।
वह एक दिन अपने किसी रिश्तेदार के घर की ओर जा रहा था तब ही एक मोटरसाइकिल ने उसे पीछे से टक्कर मार दी। एक पीसीआर ने पास के अस्पताल में भर्ती कराया जहां से उसे सफदरजंग अस्पताल रेफर कर दिया गया।
हालांकि कई टेस्ट करने के बाद सुनिश्चित हो गया था वह शख्स ब्रेन डेड हो चुका है। यही देखते हुए अस्पताल ने परिवार को उसके अंगदान के लिए मनाना शुरु किया।
शेरावत के अनुसार, शुरुआत में तो उसका परिवार झिझक रहा था और चाचा जिन्होंने उसे पाल पोसकर बड़ा किया था इतना रोए जा रहे थे कि किसी के चुप कराने से चुप नहीं हो रहे थे। बाद में उन्होंने सभी अंग दान करने के लिए स्वीकृति दे दी।
बहुत जटिल होता है 22 से 26 फीट लंबी छोटी आंत का प्रत्यारोपण
safdarjung hospital
इस वक्त दानकर्ता का परिवार उत्तराखंड में है और अंतिम संस्कार के बाद की जो भी औपचारिकताएं हैं वो पूरी की जा रही हैं। अस्पताल ने अपनी नीति के तहत गुप्तता बरकरार रखने के लिए अन्य जानकारी देने से इंकार कर दिया है। एक अधिकारी का कहना है कि अस्पताल दानकर्ता परिवार को अगले हफ्ते अंग दान करने के लिए सम्मानित करने की तैयारी कर रहा है।
एक डॉक्टर के अनुसार छोटी आंत को प्रत्यारोपित करना इतना आसान नहीं होता क्योंकि वह 22 से 26 फीट तक लंबी होती है। इसके साथ ही वो कई तरह के नोड्स, लिम्फ और टिश्यू से घिरे होने के कारण भी काफी जटिल होती है।
एक जरा सी गलती भी सारे काम को बर्बाद कर सकती है। यही वजह है कि बहुत से सर्जन इसे करने से कतराते हैं। डॉक्टर आगे कहते हैं कि इसके साथ ही ट्रांसप्लांट के बाद शरीर इसे रिजेक्ट करे इसका भी बड़ा खतरा बना रहता है।