निर्माण से जुड़ी सभी बाधाएं दूर होने के बाद राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र परिवहन निगम (एनसीआरटीसी) ने रैपिड ट्रेन कोच निर्माण की दिशा में काम शुरू कर दिया है। 2020 में गाजियाबाद को देश की पहली रैपिड ट्रेन तैयार होकर मिल जाएगी जो अप्रैल 2023 में साहिबाबाद से दुहाई के बीच दौड़ेगी।
ट्रेन निर्माण को लेकर एनसीआरटीसी ने इंटरनेशनल टेंडर आमंत्रित किया है। टेंडर डालने वाली कंपनी की तकनीकी और वित्तीय निविदा को अलग-अलग परखा जाएगी। तकनीकी निविदा में पास होने के बाद भी वित्तीय टेंडर को देखा जाएगा। उधर, कॉरिडोर निर्माण को लेकर सिविल वर्क से जुड़े सभी टेंडर जारी कर दिए गए हैं।
सरांय काले खां से मेरठ के बीच 82 किमी का रैपिड ट्रेन कॉरिडोर बनाया जा रहा है। 30 हजार करोड़ रुपये से अधिक की लागत में बनने वाले इस कॉरिडोर के पहले चरण में दुहाई से साहिबाबाद के बीच अप्रैल 2023 में ही रैपिड ट्रेन को चलाने की तैयारी है। इस दिशा में एनसीआरटीसी की तरफ से प्राथमिकता के आधार पर काम किया जा रहा है।
करीब 19 किलोमीटर की दूरी में चलने वाली देश की पहली रैपिड ट्रेन के कॉरिडोर का निर्माण भी प्रगति पर है। काम समय पर पूरा हो इसके लिए एनसीआरटीसी ने मेरठ तिराहे से दुहाई और साहिबाबाद से मेरठ तिराहे के बीच की दूरी को दो हिस्सों में बांट कर निर्माण किया जा रहा है। पहले हिस्से में दुहाई से मेरठ तिराहे के बीच काम चल रहा है जबकि दूसरे हिस्से का सिविल टेंडर जारी हो चुका है।
कंपनी अगले एक सप्ताह में निर्माण शुरू कर देगी। उधर, सभी विभागों से निर्माण से जुड़ी एनओसी भी मिल चुकी है। अब एनसीआरटीसी ने ट्रेन की बोगी समय पर उपलब्ध कराने की दिशा में काम शुरू कर दिया है।
सितंबर 2022 तक मिलेगी पहली ट्रेन
एनसीआरटीसी ने पहले चरण का कॉरिडोर तैयार करने के लिए अक्तूबर 2022 की समय सीमा रखी है, जिससे की मार्च तक रूट का ट्रायल रन व अन्य विभागों से एनओसी मिलने का काम पूरा हो सकी। निर्धारित समय सीमा को देखते हुए टेंडर हासिल करने वाली कंपनी को सितंबर 2022 तक पहले ट्रेन तैयार करके दुहाई यार्ड में खड़ी करनी होगी, जिससे की चार-पांच महीने आसानी से ट्रायल रन किया जा सके। इसके साथ ही अप्रैल 2023 तक चार अन्य ट्रेन उपलब्ध करानी होंगी। इनकी संख्या घटाई या बढ़ाई भी जा सकती है।
मेक इन इंडिया के तहत होगी निर्माण
रैपिड ट्रेन के निर्माण पर मेक इन इंडिया के प्रावधान भी लागू होंगे। टेंडर हासिल करने वाली कंपनी को कुछ हद तक ट्रेनों में इस्तेमाल होने वाले उपकरणों का उत्पादन भारत के अंदर ही करना होगी। इसके साथ ही लंबी अवधि के बाद निर्माण इकाई देश के अंदर ही खोलनी पड़ेगी।
पिलर खड़े के बाद एक वर्ष में पूरा ट्रैक तैयार
निर्माण कार्य में देरी न हो इसके लिए कास्टिंग यार्ड में पहले से ही रूट निर्माण में इस्तेमाल होने वाले पार्ट्स को तैयार कर लिया जाएगा। इसके लिए एनसीआरटीसी ने वसुंधरा में कास्टिंग यार्ड उपलब्ध करा दिया जा। जहां पर दोनों हिस्सों में काम करने वाली कंपनियां पहले से पार्ट तैयार कर सकेगी। एनसीआरटीसी का कहना है कि पिलर खड़े होने पर रूट निर्माण पर करीब एक साल का वक्त लगेगा।
एनसीआरटीसी के सीपीआरओ सुधीर शर्मा ने बताया कि साहिबाबाद से दुहाई के बीच अब कोई बाधा नहीं है। सिविल वर्क के सभी टेंडर जारी कर दिए गए हैं। रूट पर दौड़ने वाली ट्रेन के निर्माण हेतु इंटरनेशनल टेंडर आमंत्रित किए गए हैं। हमारी लक्ष्य हर हाल में अप्रैल 2023 तक ट्रेन चलाने का है। - सुधीर शर्मा, सीपीआरओ एनसीआरटीसी