हाईकोर्ट ने रेप के आरोप में सात वर्ष कैद की सजा पाए दोषी को राहत प्रदान कर दी। अदालत ने जेल में उसके अच्छे व्यवहार को देखते हुए एक वर्ष काटी गई सजा को ही सजा मानते हुए उसे रिहा करने का आदेश दिया है।
अदालत ने कहा कि रेप की कथित पीड़िता व दोषी के बीच प्रेम प्रसंग था और वह अच्छी तरह से जानती थी कि वह पहले से विवाहित है, इसके बावजूद उसने चुपचाप मंदिर में विवाह किया व जब उसे छोड़ दिया तो रेप का आरोप लगा दिया।
न्यायमूर्ति एसपी गर्ग ने दोषी नरेंद्र कुमार की सजा के खिलाफ अपील को स्वीकार करते हुए यह राहत प्रदान की है। अदालत ने कहा कि पीड़िता ने यह जानने का प्रयास भी नहीं किया कि दोषी ने अपनी पत्नी से तलाक लिया है या नहीं।
उसने आर्य समाज मंदिर में उससे गुपचुप तरीके से विवाह किया। अदालत ने अपने फैसले में कहा कि मई 2013 में पीड़िता ने युवक से चुपचाप आर्य समाज मंदिर में शादी की, ऐसा करते हुए उसने न तो अपने माता-पिता से अनुमति ली और न ही किसी को बताया था।