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'रेप पीड़िता ने गुपचुप विवाह किया था, छोड़ दिया तो लगाया गंभीर आरोप'

Wed, 12 Oct 2016 12:15 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, नई दिल्ली
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- फोटो : DEMO Pics
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हाईकोर्ट ने रेप के आरोप में सात वर्ष कैद की सजा पाए दोषी को राहत प्रदान कर दी। अदालत ने जेल में उसके अच्छे व्यवहार को देखते हुए एक वर्ष काटी गई सजा को ही सजा मानते हुए उसे रिहा करने का आदेश दिया है। 
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अदालत ने कहा कि रेप की कथित पीड़िता व दोषी के बीच प्रेम प्रसंग था और वह अच्छी तरह से जानती थी कि वह पहले से विवाहित है, इसके बावजूद उसने चुपचाप मंदिर में विवाह किया व जब उसे छोड़ दिया तो रेप का आरोप लगा दिया।

न्यायमूर्ति एसपी गर्ग ने दोषी नरेंद्र कुमार की सजा के खिलाफ अपील को स्वीकार करते हुए यह राहत प्रदान की है। अदालत ने कहा कि पीड़िता ने यह जानने का प्रयास भी नहीं किया कि दोषी ने अपनी पत्नी से तलाक लिया है या नहीं।
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उसने आर्य समाज मंदिर में उससे गुपचुप तरीके से विवाह किया। अदालत ने अपने फैसले में कहा कि मई 2013 में पीड़िता ने युवक से चुपचाप आर्य समाज मंदिर में शादी की, ऐसा करते हुए उसने न तो अपने माता-पिता से अनुमति ली और न ही किसी को बताया था। 
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एक साल की है रेप के दोषी की सजा

कोर्ट - फोटो : file photo
अक्तूबर 2013 में वह अपने घर से गायब हो गई। जनवरी 2014 में जब युवक ने उसे छोड़ दिया तो वह वापस अपने माता-पिता के घर गई और आप बीती सुनाई।
पीड़िता ने आरोप लगाया था कि मंदिर में शादी के बाद वह युवक के साथ किराये के मकान में रही। जहां उन्होंने शारीरिक संबंध बनाए। जब वह गर्भवती हो गई तो युवक ने उसका गर्भपात करवा दिया। 

उसने कहा था कि उसने अपनी पत्नी को तलाक नहीं दिया है। इसके बाद वह चला गया और फिर वापस नहीं आया। पीड़िता का आरोप था कि युवक ने अपने तलाक न होने की बात उससे छुपाई थी। 

अदालत ने कहा कि इस मामले में दोषी राहत पाने का हकदार है। अदालत ने दोषी के अच्छे व्यवहार, पूर्व में किसी आपराधिक मामले में शामिल न होने के आधार अब तक जेल में बिताए उसकी एक साल व दस दिन की सजा को पर्याप्त मानते हुए उसे रिहा करने का आदेश दिया है।
 
यह मामला वर्ष 2014 सराय रोहिल्ला थाने का है। पीड़िता की शिकायत पर निचली अदालत ने 10 जुलाई 2015 को नरेंद्र को सात साल कैद व पांच हजार रुपये जुर्माने की सजा दी थी, जिसे हाईकोर्ट में चुनौती दी गई थी।
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