मनौवैज्ञानिक डॉ. अरूणा ब्रूटा ने कहा कि दुष्कर्म की शिकार ढाई और पांच साल की बच्चियां ताउम्र एक सदमे में जीएंगी।
चाहे कितनी भी काउंसलिंग की जाए, उनका दर्द जिंदगी भर उन्हें एक डर और सदमे के साये में जीने को मजबूर करेगा। इस दर्द की भरपाई कोई नहीं कर सकेगा।
इस घटना का असर जीवन भर देखने को मिलता है। ऐसी बच्चियां कभी किसी पुरुष पर भरोसा नहीं कर पातीं। वे अपनी ही नजरों में इज्जत नहीं ला पाती हैं।