नगर परिषद् विभाग सोहना ने सामलात देह भूमि की जंग जीत ली है। जिला उपायुक्त अदालत ने मामले का निर्णय परिषद् विभाग के पक्ष में सुनाया है। ऐसा होने से परिषद् की अरबों रुपये की बेशकीमती जमीन बच गई है। इसका लोगों ने सेहत इंतकाल दर्ज कराकर भूमि अपने नाम कराने का प्रयास किया था।
विदित हो कि करीब 6 साल पहले सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर शहरी क्षेत्र में स्थापित सामलात देह भूमि को नगर पालिका (नगर परिषद्) विभाग के अधीन कर दिया था। उक्त भूमि का कुल रखबा 15,172 कनाल 8 मरला है।
इसका इंतकाल (मुटेशन) भी परिषद् विभाग के नाम दर्ज कर दिया गया था। ऐसी सामलात देह भूमि में पहाड़, कब्रिस्तान, श्मशान, जोहड़ व नदी-नाले शामिल हैं। इसका उपयोग प्रत्येक आदमी कर सकता है लेकिन इसके विपरीत स्थानीय बिश्वेदारों को उक्त निर्णय रास नहीं आया।
उन्होंने तहसीलदार सोहना से भूमि का मुतनाजा (विवादित) बनवाकर एसडीएम सोहना की अदालत में भेज दिया। इसको एसडीएम ने खारिज कर दिया था। जिसकी अपील गत दिनों जिला उपायुक्त की अदालत में की गई थी। उपायुक्त ने दोनों पक्षों की दलीलों व दस्तावेज के आधार पर सेहत इंतकाल को खारिज कर फैसला नगर परिषद् विभाग के पक्ष में दे दिया है।
वहीं, परिषद् विभाग के बिल्डिंग इंस्पेक्टर प्रदीप कादयान ने बताया कि उपायुक्त अदालत ने निर्णय फैसला नगर परिषद् विभाग के हक में दिया है। यह भूमि परिषद् विभाग की रहेगी। जिसका मुटेशन व कब्जा भी यथावत रहेगा।