-आयोजकों ने बताया, गैस सिलिंडर न मिलने से भंडारा लगाना हुआ मुश्किल
-कई जगह मजबूरन जलानी पड़ी लकड़ी और कोयले की भट्ठी, घटाया भंडारे का प्रसाद
संवाद न्यूज एजेंसी
नई दिल्ली। अमेरिका-इस्रराइल और ईरान में युद्ध के चलते भू-राजनीतिक तनाव का असर दिल्ली में रामनवमी पर भंडारा और प्रसाद वितरण पर भी दिखा। 25 दिन पहले सिलिंडर बुक होने के बावजूद भी आयोजकों को गैस नहीं मिली। ऐसे में कुछ आयोजकों ने लकड़ी, कोयला, पीएनजी और घरेलू गैस का उपयोग कर भंडारे का प्रसाद बनाया, तो वहीं कुछ ने अपने आयोजन को रद्द कर दिया।
मौजपुर स्थित मोहनपुरी आरडब्ल्यूए अध्यक्ष दीपक अग्रवाल ने बताया कि पिछली बार मोहन बाबा मंदिर में बड़े स्तर पर भंडारा और प्रसाद वितरण हुआ, लेकिन इस बार एलपीजी संकट की वजह से छोटे स्तर पर ही उनके इलाके में भंडारा लगा। इसके अलावा रामनगर में कई स्थानों पर लकड़ी और कोयले का इस्तेमाल किया गया। वेस्ट ज्योति नगर निवासी विनोद जैन ने बताया कि इस बार भंडारे के लिए कई गैस एजेंसियों से एलपीजी के लिए संपर्क किया, लेकिन उन्हें सिलिंडर नहीं मिला। उन्होंने घरेलू गैस का इस्तेमाल कर भंडारा बनाया और श्रद्धालुओं में वितरित किया। वहीं, शकरपुर स्थित उपाध्याय ब्लॉक में श्रीराम मंदिर में एलपीजी संकट की वजह से भंडारे का आयोजन नहीं हो सका। ऐसे में श्रद्धालुओं को सिर्फ प्रसाद वितरण किया गया।
लकड़ी, कोयला और पीएनजी का हुआ इस्तेमाल, बजट भी घटा : गैस संकट की वजह से कई आयोजन समितियों ने अपने कार्यक्रम के स्वरूप में बदलाव किया। कुछ आयोजकों ने बताया कि एलपीजी नहीं मिलने से उन्होंने इस वर्ष भंडारा बड़े स्तर पर करने के बजाय बेहद सीमित स्तर पर किया। वहीं, शास्री पार्क और गांधी नगर जैसे स्थानों पर गैस की कमी से मजबूरन घरेलू सिलिंडरों, लकड़ी और कोयला का उपयोग करना पड़ा। इसके लिए भंडारे के लिए बजट भी घटाए गए। इसके अलावा कई छोटे संगठनों ने संसाधनों के अभाव में इस बार भंडारा नहीं किया। इनमें शकरपुर, द्वारका और ग्रीन पार्क समेत अन्य इलाका शामिल है।
हनुमान जयंती पर भंडारे के लिए अभी से जुटा रहे सिलिंडर : हनुमान जयंती पर भंडारे के लिए आयोजक अभी से सिलिंडर जुटाने में लगे हैं। उनका कहना है कि रामनवमी पर एलपीजी सिलिंडर नहीं मिलने से मुश्किलों का सामना करना पड़ा। कई गैस एजेंसियों से वाणिज्यिक सिलिंडर मांगे, लेकिन उन्हें सिलिंडर नहीं मिला। आयोजकों ने इस बार किसी तरह लकड़ी, कोयला और घरेलू एलपीजी का इस्तेमाल भक्तों में प्रसाद और भंडारे का वितरण किया। वहीं, आगामी परिस्थिति को भांपते हुए आयोजक अभी भंडारे और प्रसाद का इंतजाम कर रहे हैं, ताकि ऐन मौके पर उन्हें इधर-उधर न भटकना पड़े।
पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव का असर एलपीजी सिलिंडर पर हुआ है। भंडारे के लिए कई गैस एजेंसियों से संपर्क किया, लेकिन नहीं मिला। ऐसे में घरेलू सिलिंडर का उपयोग कर भंडारे का आयोजन किया।-पवन जिंदल, संस्थापक, रोटी बैंक हमारा परिवार।
इस बार गैस की कमी थी। बावजूद इसके आम लोगों ने बढ़-चढ़कर सहयोग किया। कई लोगों ने अपने घरों के अतिरिक्त सिलिंडर, डबल कनेक्शन और बिजली के चूल्हे उपलब्ध कराकर भंडारे में योगदान दिया।-संजय गुप्ता, रामायण सत्संग मंटोला, पहाड़गंज