अयोध्या के विवादित राम जन्मभूमि-बाबरी मस्जिद स्थल के आसपास के करीब 67 एकड़ भूमि अधिग्रहण को लेकर 1993 में बने केंद्रीय कानून की सांविधानिक वैधता को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी गई है। लखनऊ के दो वकीलों सहित सात राम भक्तों द्वारा दायर याचिका में कहा गया है कि संसद को राज्य की भूमि अधिग्रहण करने का अधिकार नहीं है।
याचिका में कहा गया है कि सिर्फ राज्य को अपने क्षेत्र के सभी धार्मिक संस्थानों के क्रियाकलापों के प्रबंधन पर नियम बनाने का अधिकार है। एक्वीजिशन ऑफ सर्टेन एरिया ऑफ अयोध्या एक्ट, 1993 संविधान के अनुच्छेद-25 के तहत मिले संरक्षण का उल्लंघन है।
इस एक्ट के तहत अधिगृहित की गई 67.703 एकड़ भूमि, जो श्रीराम जन्म भूमि न्यास, मानस भवन, संकट मोचन मंदिर, राम जन्मस्थान मंदिर, जानकारी महल और कथा मंडप की है, वहां पूजा पाठ करने में बाधा नहीं डाली जाए।
केंद्र व राज्य सरकार को निर्देश दिया जाए कि वे इसमें दखल न दें। याचिका में कहा गया है कि संविधान के अनुच्छेद-294 में स्पष्ट है कि उत्तर प्रदेश की जमीन और संपत्तियों पर राज्य सरकार का अधिकार है।