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Indian Railway: रेल यात्रियों तक पहुंच रहा उनका छूटा सामान, लगातार मदद कर रहे नई दिल्ली स्टेशन प्रबंधक राकेश शर्मा

Tue, 14 Jun 2022 12:51 AM IST
विजय पुंडीर अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली

सार

नई दिल्ली रेलवे स्टेशन के प्रबंधक राकेश शर्मा रेल यात्रियों तक उनका छूटा सामान पहुंचाकर भारतीय रेलवे की छवि सुधारने में लगे हैं।  रेलवे ने उनके इस काम को मान्यता भी दी है। इसके लिए अभी तक राकेश शर्मा को सात डीआरएम पुरस्कार, एक महाप्रबंधक पुरस्कार और रेल राज्यमंत्री समेत कई विभागीय पुरस्कारों से पुरस्कृत किया गया है।
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नई दिल्ली रेलवे स्टेशन के प्रबंधक राकेश शर्मा - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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लाखों की भीड़ में अगर सामान छूट जाए तो उसके मिलने की उम्मीद आप अमूमन छोड़ देते हैं। स्टेशन और ट्रेन में छूटे सामान का मिल पाना संभव नहीं हो पाता है। स्टेशन पर यात्रियों की रेलमपेल के बीच छूटे सामान की वापसी का अगर फोन आ जाए तो हैरानी होती है।

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सामान कम हो, ज्यादा हो, सस्ता या महंगा हो, मिलने पर अमूल्य निधि सा ही लगता है। दूसरी जगहों पर इस तरह के सामान मिल पाना तो अपवाद ही रहता है, लेकिन नई दिल्ली रेलवे स्टेशन के स्टेशन प्रबंधक राकेश शर्मा अपनी ड्यूटी के साथ इस अमूल्य निधि को पहुंचाने का काम कर रहे हैं। उनके इस काम से दिल्ली व देश ही नहीं, बल्कि आस्ट्रेलिया, ब्रिटेन, अमेरिका, कीनिया, अर्जेंटीना, नेपाल समेत दूसरे देशों के यात्रियों तक को सहूलियत मिली है। नई दिल्ली रेलवे स्टेशन पर छूटे सामान को उन्होंने देश-विदेश तक पहुंचाया है।

सामान के मूल मालिक को ढूंढने का उनका अपना तरीका है। ट्रेन के जिस कोच और सीट पर यात्रियों का सामान छूटता है, उस आरक्षित सीट के यात्री का पता पैसेंजर नेम रिकार्ड (पीएनआर) से करते हैं। टिकट बुकिंग के समय यात्री का मोबाइल नंबर भी इसमें दर्ज होता है। कई बार जब पीएनआर में मोबाइल नंबर नहीं मिलता तो वह सोशल मीडिया के जरिये उस यात्री से संपर्क करने की कोशिश करते हैं। फेसबुक, ट्विटर और व्हाट्स एप से सामान की जानकारी वायरल होती है। इससे कई बार संपर्क सूत्र मिल जाता है। संपर्क होने पर सामान यात्री को सौंप दिया जाता है।
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रेलवे ने उनके इस काम को मान्यता भी दी है। इसके लिए अभी तक राकेश शर्मा को सात डीआरएम पुरस्कार, एक महाप्रबंधक पुरस्कार और रेल राज्यमंत्री समेत कई विभागीय पुरस्कारों से पुरस्कृत किया गया है। रेल अधिकारियों का कहना है कि सामान सही जगह पर पहुंच जाने से भारतीय रेलवे की छवि भी बेहतर हो रही है। इनके काम से प्रभावित होकर दूसरे कई स्टेशन प्रबंधक भी यात्रियों का सहयोग कर रहे हैं। खुद राकेश शर्मा ने इस काम की शुरुआत 2006 में की थी। अभी तक उन्होंने करीब 458 लोगों का सामान पहुंचाया है। इनमें मोबाइल, लैपटॉप, जरूरी दस्तावेज, नकदी समेत सोने-जवाहरात के गहने तक शामिल हैं।

सफाईकर्मी, कुली व वेंडर्स करते हैं सहयोग
इस काम में उनकी मदद कुली, सफाईकर्मी और स्टेशन पर तैनात दूसरे कर्मी करते हैं। शर्मा का कहना है कि कुली, सफाईकर्मी, वेंडर या फिर ट्रेन में कार्यरत कर्मचारी और कई बार सहयोगी यात्री खुद लावारिस सामान को कार्यालय में सौंप देते हैं। अमूमन इसे लॉस्ट प्रॉपर्टी ऑफिस (एलपीओ) में जमा कराया जाता है। यहां जमा करने के पहले वह यह समान अपने पास रख लेते हैं और सामान मालिक तक पहुंचाने का प्रयास करते हैं। पूरी कोशिश के बाद यदि वह सामान के मूल स्वामी तक नहीं पहुंच पाता है तो वह सामान एलपीओ में जमा करवा देते हैं। मजेदार बात यह है कि पिछले चार-पांच साल से नई दिल्ली रेलवे स्टेशन के एलपीओ में कोई सामान जमा नहीं हुआ है। पिछले दिनों ऑस्ट्रेलिया से भारत आये पॉल मलाम नाम के एक विदेशी का लैपटॉप लौटाने के साथ सोने का लॉकेट, कालका शताब्दी ट्रेन के यात्री अमन सहगल का सामान समेत वह अब तक 458 लोगों का सामान लौटा चुके हैं।

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