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Delhi NCR News: सर्दियों में ऑटोइम्यून बीमारियों का बढ़ जाता है अधिक खतरा

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-पुरुषों की तुलना में ऑटोइम्यून बीमारियों से महिलाएं सबसे ज्यादा होती है प्रभावित

अमर उजाला ब्यूरो
नई दिल्ली। सर्दियों में बढ़ती ऑटोइम्यून बीमारियों के खतरे को लेकर एम्स में बैठक हुई। जहां इसके लक्षण और इससे बचने के उपायों को लेकर गहन चर्चा की गई। यह मामले एम्स में तेजी से पहुंच रहे हैं। ऐसे मरीजों को बुखार, थकावट, मुंह और आंख के सूखने, धूप में जाने पर खुजली, त्वचा पर चकत्ते होने, मांसपेशियों में दर्द जैसे लक्षण देखने को मिल रहे हैं।


बैठक के दौरान एम्स रूमेटोलॉजी विभाग की प्रमुख डॉ. उमा कुमार ने बताया कि ऑटोइम्यून बीमारियों के बढ़ने की कई वजह है। इसमें जीवन शैली में बदलाव, वायु प्रदूषण, विटामिन डी की कमी, हाइजीन हाइपोथिसिस जैसे दूसरे कारण शामिल है। सर्दी के मौसम में ऑटोइम्यून का जोखिम बढ़ जाता है। पुरुषों की तुलना में महिलाओं में ऑटोइम्यून बीमारियां अधिक होती है। महिलाओं में सेक्स हार्मोन इम्यूनिटी में अहम भूमिका निभाते है। इस वजह से उन्हें ऑटोइम्यून बीमारियां होने की संभावना अधिक होती है। डॉ. उमा ने बताया कि हमारा शरीर अपने प्रोटीन संरचना की खुद पहचान करता है। यह प्रक्रिया इम्यून द्वारा नियंत्रित होती है। कभी-कभी किन्हीं वजह से ऐसा होता है कि शरीर के प्रोटीन में कुछ ऐसा बदलाव होता है जिसकी वजह से शरीर उनकी पहचान करना बंद कर देता है।
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ऑटो इम्यून बढ़ने से बढ़ती है हाइपरटेंशन

ऑटोइम्यून बीमारी होने पर हाइपरटेंशन, डायबिटीज, स्ट्रोक, कोरोनरी आर्टरी सब बढ़ जाता है। करीब 60 से अधिक बीमारियां इस श्रेणी में आती है। महिलाओं में गर्भपात जैसी समस्या भी अधिक देखने को मिलती है। सर्दियों में जोड़ों में जकड़न और दर्द जैसे समस्याएं बढ़ जाती है।
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पर्याप्त धूप लेना है जरूरी
धूप पर्याप्त लेना जरूरी है। ऐसा न करने से विटामिन डी की कमी होने लगती है। शरीर के टिश्यू और सेल बढ़ जाने से नर्व पर प्रभाव पड़ता है। जिससे दर्द और जकड़न महसूस होती है।



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