मौसम की बेरूखी से दक्षिणी हरियाणा के खास हिस्से (गुड़गांव-मेवात) में ‘पीली क्रांति’ को ग्रहण लग गया है। लगातार बरसात इस इलाके की कृषि अर्थव्यवस्था की रीढ़ समझी जाने वाली सरसों की फसल के लिए ‘तेजाब’ साबित हो रही है। जिस कारण पिछले साल के मुकाबले इस बार सरसों के चौथाई उत्पादन की आशंका जताई जा रही है।
हरियाणा में श्वेत और हरित क्रांति के बाद पीली क्रांति (सरसों उत्पादन) में गुड़गांव-मेवात की अहम भूमिका है। हरियाणा में कुल सरसों उत्पादन का करीब 80 फीसदी उत्पादन गुड़गांव-मेवात सहित रेवाड़ी-महेंद्रगढ़-भिवानी में होता है। रेवाड़ी-महेंद्रगढ़-भिवानी के मुकाबले कम कृषि योग्य भूमि होने के बावजूद गुड़गांव-मेवात में करीब 1800 किलोग्राम प्रति हेक्टेयर सरसों का उत्पादन किया जाता है।
गुड़गांव के पटौदी, सोहना, फर्रूखनगर और मेवात में इस बार करीब 45000 हेक्टेयर भूमि पर सरसों की खेती की जा रही है। पिछले सप्ताह दो दिन और इस सप्ताह लगातार तीन दिन की बरसात और तुफानी हवाओं से यहां सरसों की फसल को भारी नुकसान हुआ है।
बरसात की सीलन से सरसों में फफूंदी रोग लग गया है। जिससे तना टूट रहा है। फर्रूखनगर के पुरस्कृत किसान राव मानसिंह के अनुसार सरसों पूरे पकाव पर थी कि बरसात ने सब मेहनत पर पानी फेर दिया। हवाओं से पेड़ टूटकर जीमन में गिर गए हैं। जिससे फलियां गल गई है। अगर बरसात नहीं होती तो इस सप्ताह कटाई आरंभ हो जाती है। उन्होंने कहा कि इस बार पिछले साल के मुकाबले चौथाई उत्पान हो जाए तो गनीमत।
उनके अनुसार यहां के किसान सरसों की फसल पर निर्भर करते हैं, लेकिन इस बार मौसम की बेरूखी का कहर टूटा है। उन्होंने कहा कि गेंहू की फसल को भी नुकसान है। क्योंकि बरसात के साथ हवाओं के कारण गेंहू के पेड़ भी जमीन पर गिर गए हैं। गेंहू अब पूरे तरीके से पक नहीं पाएगा। सरसों के नुकसान की भरपाई करना नामुमकिन है।
कृषि विशेषज्ञ जेपी शर्मा, पी. सिंह भी सरसों के नुकसान की बात कहते हैं। उनके अनुसार नुकसान से उत्पादन में भारी गिरावट आएगी।