कोरोना वायरस के खिलाफ लड़ाई में स्वास्थ्य मंत्रालय के साथ ही रेल मंत्रालय भी अहम भूमिका निभा रहा है। पैसेंजर ट्रेनें नहीं चलने की स्थिति में भी रेलकर्मी घर नहीं बैठे हैं, बल्कि रोज नए-नए प्रयोग कर वह सब बना रहे हैं, जिससे कोरोना वायरस के संक्रमित लोगों को बचाया जा सके। इसी कड़ी में रेलवे ने ऑक्सीजन सिलिंडर ट्रॉली बनाने में कामयाबी हासिल की है। ऑटोमैटिक सैनिटाइजर व्हीकल भी तैयार किया है, जिससे ट्रेनों के साथ ही ट्रैक को भी कीटाणुरहित किया जा सकेगा।
रेलवे के रतलाम डीजल शेड में प्रयोग के तौर पर 50 ऑक्सीजन सिलिंडर ट्रॉलियां तैयार कर मंडल चिकित्सालय को दी हैं। इसी तरह भूसावल इलेक्ट्रिकल लोको शेड ने ऑटोमैटिक सैनिटाइजर व्हीकल बनाने में कामयाबी हासिल की है। यह पांच तरह के मिस्ट स्प्रेस सिस्टम से सोडियम हाइपोक्लोराइट का छिड़काव करता है। खास बात यह है कि इस व्हीकल से जब कीटाणुनाशक दवा का छिड़काव होता है तो चालक इसके संपर्क में नहीं आता है। विदेश में भी इसी तकनीक से सैनिटाइज किया जाता है।
रेलवे अधिकारियों के अनुसार, यह पूरे तरीके से ऑटोमैटिक है। इसका प्रयोग ट्रेनों के सैनिटाइजेशन के साथ ही रेल ट्रैक, लोको शेड और वॉशिंग एरिया समेत अन्य जगहों पर भी किया जा सकेगा। कोरोना वायरस के खिलाफ लड़ाई के लिए दोनों उपकरण बेहद ही अहम हैं।