कन्हैया को देशद्रोही बताने में जहां भाजपा रात दिन एक किए हुए है वहीं कन्हैया की तारीफ में गैर भाजपा राजनैतिक दलों में होड़ सी मची हुई है। पांच राज्यों में चुनावों की घोषणा के बाद राहुल-केजरीवाल मुलाकात के लोग अलग-अलग सियासी मायने निकाल रहे हैं।
इस बीच चर्चा यह भी हो रही है कन्हैया के नारों से आजादी शब्द को अपने काम व प्रचार में शामिल करने वाले आप के सुप्रीमो अरविंद केजरीवाल से कन्हैया की मुलाकात तय होकर भी क्यों नहीं हो सकी?
कुछ दिन पूर्व डी राजा तो मुख्यमंत्री के पास पहुंच गए लेकिन कन्हैया के जाम में फंसने की वजह से उनके न पहुंचने की बात बताई गई। लेकिन सूत्रों का कहना है कि कन्हैया की केजरीवाल से मिलने में दिलचस्पी नहीं थी।
मीडिया में इस मुलाकात की खबर आने के बाद केजरीवाल ने कन्हैया के न पहुंचने पर नाराजगी भी जताई थी। इसको इसलिए भी बल मिलता है कि इसके बाद भी दोनों के बीच मुलाकात की कोई कोशिश नहीं हुई।
हालांकि केजरीवाल सरकार ने कन्हैया के भाषण व उसके आजादी के नारों से प्रेरित होकर अपना प्रचार आगे बढ़ाया है। इसी के चलते दिल्ली की विभिन्न सड़कों पर बढ़ते बिजली बिल से आजादी, पानी बिल से आजादी, भ्रष्टाचार से आजादी, नकली वादों से आजादी आदि के होर्डिंग्स लगाए हैं।