अमर उजाला ब्यूरो
पूर्वी दिल्ली।
दिल्ली स्टेट कैंसर इंस्टीट्यूट (डीएससीआई) में रेडियोथेरेपी की कई मशीनें लंबे समय से बंद होने के कारण कैंसर मरीजों को इलाज के लिए दूसरे अस्पतालों का रुख करना पड़ रहा है। सरकारी अस्पताल में जरूरी सुविधा उपलब्ध नहीं होने से मरीजों और उनके परिवारों को आर्थिक और मानसिक परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
अस्पताल से जुड़े रिकॉर्ड के अनुसार, डीएससीआई के रेडियोथेरेपी विभाग की आठ मशीनें अपनी तय इस्तेमाल की अवधि पूरी कर चुकी हैं और लंबे समय से बंद हैं। इनमें डुअल-फोटॉन-एनर्जी लीनियर एक्सेलेरेटर भी शामिल है। अधिकारियों के मुताबिक, इस मशीन को 2007 में करीब 9.2 करोड़ रुपये की लागत से खरीदा गया था, लेकिन यह 2020 से काम नहीं कर रही है।
पूर्वी दिल्ली की 70 वर्षीय महिला को 2025 में गर्भाशय के कैंसर का पता चला था। उनके बेटे निखिल घई उन्हें इलाज के लिए डीएससीआई लेकर पहुंचे। हालांकि, रेडिएशन थेरेपी की सुविधा उपलब्ध नहीं होने के कारण उन्हें सार्वजनिक चैरिटेबल ट्रस्ट की ओर से संचालित एक अस्पताल भेजा गया, जहां उनकी मां का इलाज मुफ्त में हुआ।
एक अन्य मरीज के तीमारदार विवेक ने बताया कि वे सरकारी अस्पताल में इलाज की उम्मीद लेकर आए थे, लेकिन मशीनें बंद होने के कारण उन्हें बाहर इलाज कराना पड़ा। उन्होंने कहा कि कैंसर का इलाज पहले ही बेहद महंगा है और ऐसे में सरकारी अस्पताल की सुविधा बंद होने से मरीजों के परिवार के लिए बड़ी परेशानी है। निजी अस्पतालों में रेडियोथेरेपी और कैंसर के इलाज का खर्च लाखों रुपये तक पहुंच सकता है। ऐसे में सरकारी अस्पताल में सुविधा नहीं मिलने से आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों पर अतिरिक्त बोझ पड़ रहा है।