देश भर में धमकी भरे मेल भेजने वाला लुईस श्रीनिवास उर्फ आर. श्रीनिवास धमकी भरे मेल भेजने में इतना शातिर हो गया था कि उसने अकेले दिल्ली हाईकोर्ट में ही 1000 से ज्यादा धमकी भरे मेल भेजे थे। ये खुलासा करीब सात दिन पहले पकड़े गए आरोपी के लैपटॉप से हुआ है।
आरोपी आर. श्रीनिवास को पकड़ने वाली दिल्ली पुलिस की नई दिल्ली जिले की साइबर थाना पुलिस ने मैसूर स्थित उसके घर से बृहस्पतिवार को लैपटॉप बरामद किया है। आरोपी इसी लैपटॉप से ही धमकी भरे मेल भेजता था। आरोपी का असली नाम आर श्रीनिवास है, मगर वह पहचान बदलकर लुईस श्रीनिवास बनकर रह रहा था।
नई दिल्ली जिले के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि आरोपी दिल्ली हाईकोर्ट, सुप्रीम कोर्ट समेत देश के सभी हाईकोर्ट को धमकी भरे मेल भेजा चुका है। उसने पाकिस्तान सरकार व पाकिस्तान के हाईकोर्ट को धमकी भरे मेल भेजे थे। इस पुलिस अधिकारी ने बताया कि ये धमकी भरे मेल कई साल से भेज रहा था। शुरुआत में ये जनरल मेल भेजता था।
धीरे-धीरे इसके मेल खतरनाक होते चले गए। पिछले कुछ महीने से वह मेलों में बम जैसे शब्दों का बहुत ज्यादा इस्तेमाल करने लगा था। अब इसके मेल बहुत ज्यादा सीरियस हो गए थे और सुरक्षा एजेंसियां बहुत ज्यादा परेशान होने लग गई थींं। उसने मार्च महीने तक ही दिल्ली हाईकोर्ट को 1000 से ज्यादा धमकी भरे मेल भेज दिए थे।
कुछ मेल इसने कन्नड़ भाषा में भेजे थे। पुलिस इसके लैपटॉप को फोरेंसिक जांच के लिए भेजने की तैयारी कर रही है। पुलिस अधिकारियों के अनुसार आरोपी की वह आईडी मिल भी गई है जिससे वह धमकी भरे मेल भेजता था। उसने आईडी याहू पर बना रखी थी। पुलिस अधिकारियों ने कहा कि इसको धमकी भरे मेल भेजकर लोगों को तंग व दुखी करने में मजा आता था। वह इसके जगह धमकी भरा भेजता था तो अन्य जगहों पर वह सीसी करके भेजता था।
कई कॉलेजों में पढ़ाता था
आरोपी आर श्रीनिवास अकेला रहता था और जल्दी-जल्दी अपने घर बदलता रहता था। उसने बीए, एमए के साथ एमबीए भी किया हुआ है। उसने लॉ की पढ़ाई बीच में ही छोड़ दी थी। उसने कई प्राइवेट कॉलेजों में राजनीतिक विज्ञान भी कई साल पढ़ाया है।
उसने कोई में वकील के साथ काम किया है। इस कारण वह ज्यादातर कोर्ट को ही धमकी भरे मेल भेजता था। आरोपी 47 वर्ष को हो चुका है और अभी तक उसकी शादी नहीं हुई है। पुलिस जांच में यह भी सामने आया है कि आरोपी तकनीकी रूप से काफी दक्ष था और इंटरनेट का इस्तेमाल छिपकर करने के कई तरीके जानता था।
वह अलग-अलग आईपी एड्रेस और वर्चुअल प्राइवेट नेटवर्क का उपयोग कर अपनी पहचान छिपाने की कोशिश करता था। इसके बावजूद साइबर सेल की टीम ने डिजिटल ट्रेल के आधार पर उसकी लोकेशन ट्रैक कर ली। जांच अधिकारियों का कहना है कि आरोपी का व्यवहार असामान्य था और वह लंबे समय से अकेलेपन का शिकार था।
बीएसएनएल की वजह से अभी तक नहीं पकड़ा गया था
नई दिल्ली जिला पुलिस अधिकारियों ने कहा कि आरोपी बीएसएनएल के इंटरनेट का इस्तेमाल कर रहा था। उसे पता था कि बीएसएनएल से जल्द ही न तो लोकेशन, और न ही सीडीआर मिलती थी। नई दिल्ली जिला पुलिस ने बीएसएनएल से कई बार इसकी लोकेशन व सीडीआर मांगी थी, मगर बीएसएनएल से अपेक्षित सहयोग नहीं मिला। पुलिस ने बीएसएनएल से कर्ई बार पत्राचार भी किया था। आरोपी वीपीएन का इस्तेमाल नहीं कर रहा था।