देश के सबसे बड़े चिकित्सीय संस्थान एम्स में अक्सर आपातकालीन स्थिति में भर्ती होने के लिए मरीजों को काफी जद्दोजहद करनी पड़ती है। कई बार बिस्तर खाली न होने से मरीजों को सफदरजंग या अन्य किसी अस्पताल में जाने की सलाह तक दी जाती है। इसीलिए अब एम्स प्रबंधन आपातकालीन विभाग के विस्तार पर काम कर रहा है।
एम्स के नए मास्टर प्लान को केंद्र सरकार से मंजूरी मिलने के बाद अब आपातकालीन विभाग में जल्द ही दोगुने से ज्यादा बिस्तरों की क्षमता करने पर काम शुरू होगा। हालांकि इससे पहले अगले माह सितंबर में एम्स की ओपीडी नए ब्लॉक में शिफ्ट होगी।
एम्स में रोज करीब 8 से 9 हजार मरीज ओपीडी में उपचार के लिए पहुंचते हैं। दिल्ली के अलावा हरियाणा, पंजाब, यूपी, बिहार और राजस्थान से सर्वाधिक मरीज ओपीडी में आते हैं। ऐसे में काफी समय से ओपीडी के विस्तार पर एम्स काम कर रहा था। इसी सिलसिले में एम्स परिसर में ओपीडी के लिए अलग से नया ब्लॉक भी बनकर तैयार हो चुका है।
मस्जिद मोठ स्थित परिसर में करीब 570 कमरों वाले इस ब्लॉक में हर दिन लगभग 10 हजार मरीजों को उपचार मिल सकेगा। चूंकि वर्तमान में गेट नंबर 1 के पास ही राजकुमारी अमृत कौर ब्लॉक में ओपीडी संचालित है। इसीलिए अगले एक से दो माह में ओपीडी नए ब्लॉक में शिफ्ट हो जाएगी। इसके बाद आपातकालीन विभाग पर काम चलेगा।
एम्स के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि ओपीडी का नया ब्लॉक शुरू होने के बाद राजकुमारी ब्लॉक के रूप में एम्स को विकल्प मिलेगा। इसका इस्तेमाल आपातकालीन विभाग के विस्तार के लिए किया जाएगा। बताया जा रहा है कि राजकुमारी अमृत कौर ब्लॉक के भूतल को आपातकालीन विभाग से जोड़ने का विचार है।
वहीं ऊपरी मंजिल पर एम्स के प्रोफेसरों के लिए ऑफिस उपलब्ध कराए जाएंगे। एम्स में इस समय करीब 800 से ज्यादा फैकल्टी है, जिनमें से काफी प्रोफेसरों को बैठने के लिए ऑफिस तक उपलब्ध नहीं हो पा रहा है। इसीलिए राजकुमारी ब्लॉक की पहली मंजिल पर ऑफिस बनाने का प्रस्ताव है।
बताया जा रहा है कि एम्स ने आपातकालीन विभाग में करीब 100 से ज्यादा बिस्तरों की क्षमता बढ़ाने का प्रस्ताव तैयार किया है। इस समय करीब 35 बिस्तरों की सुविधा उपलब्ध है, जबकि दिनभर में करीब 200 से ज्यादा मरीज वार्ड में भर्ती होने पहुंचते हैं।