इंटरनेट पर विज्ञापन लिंक लाइक कराने के नाम पर 40 हजार लोगों से 260 करोड़ रुपये का फर्जीवाड़ा करने वाली वेबवर्क कंपनी की जांच में नोएडा पुलिस ने बड़े पैमाने पर लीपापोती की। शिकायतकर्ता अमित किशोर जैन के मुताबिक थाना सेक्टर-20 पुलिस द्वारा तैयार चार्जशीट के अनुसार 17 फरवरी 2017 की दोपहर पुलिस को मुखबिर से सूचना मिली थी कि दोनों आरोपी सूरजपुर कोर्ट में वकील से मिलने जा रहे हैं।
दोपहर करीब 12 बजे पुलिस ने कोर्ट के पास सादे कपड़ों में घेराबंदी की। करीब 12:30 बजे वेबवर्क कंपनी के निदेशक संदेश वर्मा और अनुराग गर्ग टैक्सी से उतरे, तभी उन्हें गिरफ्तार कर लिया गया।
शिकायतकर्ता का कहना है कि आरोपियों की गिरफ्तारी के वक्त पुलिस अधिकारियों ने ही मीडिया को जानकारी दी थी कि दोनों आरोपी सूरजपुर स्थित कार्यालय में तत्कालीन एसएसपी धर्मेंद्र सिंह से मिलने पहुंचे थे। एसएसपी ने ही अपने ऑफिस बुलवाकर दोनों आरोपियों को गिरफ्तार करवाया था।
मोटी कमाई करने वालों का स्पष्ट बयान नहीं
पुलिस ने वेबवर्क केस में लाखों रुपये की मोटी कमाई करने वाले 50 से ज्यादा लोगों को बयान दर्ज कराने के लिए नोटिस जारी किया था। संतोषजनक जवाब नहीं देने पर इनके खिलाफ गैंगस्टर एक्ट की कार्रवाई की चेतावनी दी गई थी। इसके बावजूद पुलिस ने चार्जशीट में बयान को स्पष्ट तौर पर दर्ज नहीं किया।
जैसे पुलिस ने कृष्णापुरी, प्रेमपुरी मुजफ्फरनगर निवासी सुशील कुमार को नोटिस जारी किया था। सुशील ने वेबवर्क से 34.87 लाख रुपये की कमाई की थी। सुशील द्वारा 34.87 लाख रुपये कमाने और किस काम के लिए उसे कंपनी ने ये भुगतान किया, चार्जशीट में इसका स्पष्ट जिक्र नहीं है।