पर्यावरण बचाने में आईआईटी दिल्ली देश में सबसे आगे हैं। यह पर्यावरण और जलवायु से संबंधित विषयों में विश्वस्तरीय शिक्षा भी प्रदान करता है। इसी आधार पर क्यूएस सस्टेनेबिलिटी वर्ल्ड रैंकिंग 2025 में आईआईटी दिल्ली देशभर में अव्वल रहा है।
आईआईटी दिल्ली को 255 अंकों के उछाल के साथ 171वीं रैंक मिली, जबकि पिछले साल तक देश में अव्वल रहने वाले दिल्ली विश्वविद्यालय को 79 अंकों की गिरावट के साथ 299वीं रैंक हासिल हुई।खास बात यह है कि नॉलेज एक्सचेंज श्रेणी में पिछले साल की तरह इस बार भी देश में दिल्ली यूनिवर्सिटी शीर्ष पर है। उसे दुनियाभर में 121वां तो भारतीय विज्ञान संस्थान को पर्यावरण शिक्षा के मामले में दुनियाभर में 32वां स्थान मिला है। क्यूएस के वरिष्ठ उपाध्यक्ष बेन सॉटर ने कहा कि लंदन में मंगलवार को रैंकिंग जारी हो गई। इसमें पढ़ाई, शोध, पर्यावरण नीतियों को लागू करने में भारत की 78 यूनिवर्सिटी को जगह मिली है जिसमें से 34 ने पिछले साल की तुलना में सुधार किया है और आठ ने अपनी स्थिति बरकरार रखी है।
भारतीय उच्च शिक्षा पारिस्थितिकी तंत्र और यह दर्शाता है कि भारतीय विश्वविद्यालय अपनी स्थिरता के साथ आगे बढ़ रहे हैं। हालांकि शिक्षा और स्वास्थ्य का प्रभाव और भलाई दो ऐसे क्षेत्र हैं जहां भारतीय उच्च शिक्षा प्रणाली में सुधार की गुंजाइश है। हालांकि, संस्थान पहले से ही सही दिशा में आगे बढ़ रहे हैं।
संस्थान रैंकिंग
आईआईटी दिल्ली 171
आईआईटी खड़गपुर 202
आईआईटी बॉम्बे 234
आईआईटी कानपुर 245
आईआईटी मद्रास 277
दिल्ली विश्वविद्यालय 299
इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ साइंस 376
वेल्लोर इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी 396
मनीपाल अकेडमी ऑफ हायर एजुकेशन 401
अन्ना यूनिवर्सिटी 412
वर्ल्ड क्यूएस रैंकिंग : आईपीयू को 35वां स्थान
गुरु गोबिंद सिंह इंद्रप्रस्थ विश्वविद्यालय (आईपीयू) ने क्यूएस सस्टेनेबिलिटी रैंकिंग में भारत में 35वां व एशिया में 288 वां स्थान प्राप्त किया है। विश्वविद्यालय प्रशासन में उत्कृष्टता के मामले में भारत में 25 वें स्थान पर है। कुलपति प्रो. डॉ. महेश वर्मा ने कहा कि रैंकिंग स्थिरता और अकादमिक उत्कृष्टता के प्रति हमारी अटूट प्रतिबद्धता का परिणाम है। यह हमें नवाचार और जिम्मेदारी की विरासत बनाने के लिए प्रेरित करता है। उन्होंने कहा कि विवि पर्यावरणीय अनुसंधान पर अपना ध्यान बढ़ाने के लिए तैयार है।