पूर्वी दिल्ली के शेरपुर गांव की कहानी देश की राजधानी के विकास और उसकी अनदेखी की विरोधाभासी गाथा है। यह गांव कई बार उजड़ा और बसा है। इतिहास के पन्नों में इस गांव ने समय-समय पर अपने अस्तित्व को बचाने की लड़ाई लड़ी है। यह गांव मुगलकाल में लालकिला बनाने के समय उजाड़ा गया। लेकिन उस समय भी गांववालों को मुआवजे का लाभ नहीं मिला।
आज, यह गांव मूलभूत सुविधाओं के अभाव और प्रशासनिक अनदेखी की जीती-जागती मिसाल बन चुका है। गांव में सफाई व्यवस्था से लेकर स्वास्थ्य सुविधाएं न होने से लोग परेशान हैं। अमर उजाला संवाद में शेरपुर निवासियों ने बताया कि 1957 के बाद गांव का पुनर्निर्माण तो हुआ, लेकिन इसके साथ ही समस्याएं भी जन्म लेती गईं।
दिल्ली में विकास की चकाचौंध में शेरपुर सुविधाओं के लिए तरस रहा है। गांव की समस्याओं को लेकर प्रशासन से कई बार संपर्क किया गया, लेकिन शिकायतें और समस्याएं वर्षों से जस की तस हैं। ग्रामीणों का कहना है कि नेता चुनाव के समय गांव में आते हैं और वोट मिलने के बाद वे गांव में दस्तक देना मुनासिब नहीं समझते है। शेरपुर गांव के निवासी चाहते हैं कि उनकी समस्याओं को गंभीरता से लिया जाए और स्थायी समाधान के लिए ठोस कदम उठाए जाएं।
गांव में सफाई व्यवस्था चरमराई हुई है। गलियों और सड़कों पर जगह-जगह कूड़े के ढेर लगे हैं। नियमित सफाई न होने से जगह-जगह गंदगी फैली है, जिससे निवासियों का जीवन दूभर हो गया है। कूड़े के ढेरों से विभिन्न प्रकार की बीमारियों के फैलने का भय बना रहता है। - हेमसिंह प्रधान
गांव की गलियां व सड़कें जर्जर हो चुकी हैं। पैदल चलना मुश्किल हो गया है। वाहन चलाने की तो बात छोड़ दें। सीवर व नालों का पानी ओवरफ्लो होकर बहता रहता है। बारिश के मौसम में स्थिति और भयावह हो जाती है।
- धनसिंह
गांव में प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र तक नहीं है। छोटे-मोटे इलाज के लिए भी मीलों दूर जाना पड़ता है। किसी आपात स्थिति में अस्पताल जाना हो, तो टूटी-फूटी सड़कें और खराब परिवहन व्यवस्था मुश्किलें बढ़ा देती है।
- सुधीर
गांव के लोग बस सेवा जैसी आवश्यक सुविधा से भी वंचित हैं। गांव में कोई नियमित बस सेवा नहीं है, जिससे लोग आसपास के इलाकों में जाने के लिए संघर्ष करते हैं।
- मोहित
गांव में सुरक्षा की कोई ठोस व्यवस्था नहीं है। पुलिस की गश्त न होने के कारण आए दिन चोरी की घटनाएं होती रहती हैं। सुरक्षा का अभाव गांववासियों के लिए एक बड़ी चिंता का कारण बन गया है। घरों में चोरी होना आम बात हो चुकी है।
- ईश्वर चंद