घने कोहरे के चलते पहले ही देरी से चल रही ट्रेनों का संचालन सिग्नल फेल होने से और प्रभावित हुआ। ट्रेनों को मैनुअल सिस्टम से धीरे-धीरे एक-एक कर निकाला गया।
इससे 200 से ज्यादा ट्रेनों का संचालन गड़बड़ा गया। ये 24 घंटे तक की देरी से चलाई गईं, जिससे यात्रियों को सर्दी में बड़ी परेशानी का सामना करना पड़ा।
सिग्नल सिस्टम फेल होने से दिल्ली को आने-जाने वाली ट्रेनों के अलावा मेरठ-हरिद्वार रूट, मुरादाबाद-लखनऊ रूट और इलाहाबाद-कानपुर रूट की ट्रेनें प्रभावित हुईं।
इसके चलते इन ट्रैक से संबद्ध अन्य रूट की ट्रेनें भी प्रभावित होती गईं। दिल्ली से गाजियाबाद आउटर तक ट्रेनों को 15-20 किमी की गति से निकाला गया।
एक के पीछे दूसरी ट्रेन रेंगकर चल रही थीं। एक ही ट्रैक पर आठ से दस ट्रेनों को 50-100 मीटर के आगे-पीछे धीरे-धीरे निकाला जा रहा था।
200 ट्रेनें लेट, नौ रद्द
रेलवे अफसरों के अनुसार 200 से ज्यादा ट्रेनों का संचालन सिग्नल समस्या के चलते प्रभावित हुआ है, जबकि 11 ट्रेनों को रद्द कर दिया गया। नौ ईएमयू ट्रेनों को रद्द करने के साथ ही हापुड़ शटल और जालंधर-नई दिल्ली सुपरफास्ट ट्रेन को रद्द कर दिया गया।
लंबी दूरी की ट्रेनें 12 से 20 घंटे लेट
पुरुषोत्तम एक्सप्रेस, लच्छवी एक्सप्रेस, छत्तीसगढ़ एक्सप्रेस, फरक्खा एक्सप्रेस, वैशाली एक्सप्रेस, प्रयागराज एक्सप्रेस, लखनऊ स्वर्ण शताब्दी एक्सप्रेस, काशी-विश्वनाथ एक्सप्रेस, ब्रहमपुत्र मेल, कालिंदी एक्सप्रेस, सरयू-यमुना एक्सप्रेस, श्रमजीवी एक्सप्रेस, कटिहार-आम्रपाली एक्सप्रेस आदि।