फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

सिर्फ 20 रुपये की जादुई पुड़िया से खत्म होगा दिल्ली में 'आने वाला' प्रदूषण, 10 अक्टूबर तक होगी उपलब्ध

Sat, 03 Oct 2020 06:10 PM IST
Harendra Chaudhary डिजिटल ब्यूरो, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

  • पांच अक्टूबर से दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल शुरू करेंगे अभियान
  • पूसा के वैज्ञानिकों के सहयोग से उपलब्ध दवा का 6 अक्टूबर से शुरू होगा उत्पादन
विज्ञापन
पराली जलाते किसान - फोटो : पीटीआई (फाइल)
विज्ञापन

विस्तार
वॉट्सऐप चैनल फॉलो करें

अक्टूबर से दिसंबर तक हर साल दिल्ली का दम प्रदूषण से घुटने लगता है। इसके लिए हरियाणा, पंजाब और पश्चिमी उत्तर प्रदेश के किसानों द्वारा पराली जलाने को सबसे ज्यादा जिम्मेदार माना जाता है। लेकिन अगर सब कुछ ठीक रहा तो इस साल पराली प्रदूषण का कारण नहीं बनेगी। इसका कारण यह है कि दिल्ली सरकार ने पूसा के वैज्ञानिकों के साथ मिलकर ऐसी दवाई तैयार की है, जो सिर्फ 15 दिन में पराली को खाद में बदल देगी। इससे एक तरफ जहां पराली से प्रदूषण नहीं होगा, वहीं दूसरी ओर जैविक खाद मिलने से खेतों की उर्वरा शक्ति में भी बढ़ोतरी होगी।

विज्ञापन


दिल्ली सरकार के सूत्रों के मुताबिक दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने पूसा के वैज्ञानिकों की तैयार इस दवा का निरीक्षण किया है और प्रथम दृष्टि में इसे कारगर पाया गया है। गुड़ और बेसन के घोल से तैयार होने वाली इस दवा को पराली पर छिड़काव करना होगा, जिसके बाद यह धीरे-धीरे गलना शुरू हो जाएगी। चार कैप्सूल दवाई की कीमत केवल 20 रुपये होगी जिससे 25 लीटर रासायनिक घोल तैयार होगा जिसे पराली पर छिड़कना होगा।

मंत्री गोपाल राय ने बताया है कि दिल्ली के किसानों के लिए यह दवा मुफ्त में उपलब्ध कराई जाएगी। दवा के छिड़काव के लिए मशीनें भी मुफ्त में उपलब्ध कराई जाएंगी। दिल्ली में कृषि क्षेत्र कम होने के कारण पूरी परियोजना पर केवल 20 लाख रुपये की लागत आने का अनुमान लगाया गया है। मंत्री ने बताया कि दवा का उत्पादन पांच अक्टूबर से शुरू कर दिया जाएगा। इसके पहले पांच अक्टूबर को मुख्यमंत्री प्रदूषण के विरुद्ध एक अभियान की शुरुआत करेंगे।

शुरू हो गईं पराली जलाने की घटनाएं

सरकार के इस प्रयास के बीच पंजाब के अलग-अलग क्षेत्रों में पराली जलाने की घटनाओं की शुरुआत हो चुकी है। केंद्र सरकार ने पराली जलाने की घटनाओं को रोकने के लिए 50 कमेटियों का गठन कर इस पर लगाम लगाने की बात कही है, लेकिन किसानों का कहना है कि पराली जलाने से रोकने के लिए उन्हें कोई विकल्प नहीं उपलब्ध कराया गया है। यही कारण है कि वे पराली जलाने पर मजबूर हो गए हैं।

क्या होना चाहिए विकल्प

किसान नेता चौधरी पुष्पेंद्र सिंह ने अमर उजाला को बताया कि पराली किसानों के लिए वरदान है। उन्हें किसी भी कीमत पर इसे जलाना नहीं चाहिए। इसकी बजाय उसका निबटान करने के लिए वैकल्पिक उपायों का इस्तेमाल करना चाहिए। उन्होंने कहा कि इसका सबसे बेहतर विकल्प यह हो सकता है कि केंद्र सरकार खेती को भी मनरेगा से जोड़ दे। इससे लगभग 200 रुपये की दैनिक मजदूरी पर केंद्र सरकार की तरफ से मजदूरों को मिल जाएगी, अगर किसान उन्हें मजदूरी के शेष 100-150 रुपये देकर पराली हाथ से कटवाते हैं तो इसे पशुओं के चारे में इस्तेमाल किया जा सकेगा। पराली निबटाने का यह पूर्णतया जैविक उपाय होगा।

विज्ञापन


पशुओं के खाने के 24 घंटे के अंदर यही पराली दूध, गोबर, मल-मूत्र के रूप में बाहर आएगी जो किसानों की कृषि को मजबूती देने का काम करेंगे। जिन पराली को पशु नहीं खाते हैं, उन्हें एनटीपीसी या ईंट के भट्ठों को ईंधन के रूप में उपलब्ध कराया जा सकता है। यह पराली को खत्म करने का सबसे कारगर तरीका हो सकता है।

विज्ञापन
और पढ़ें...
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें