विधानसभा चुनाव नजदीक आते ही पूर्वांचली इन दिनों सियासत की धुरी बन गए हैं। हाल ही में एक कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल के एक बयान के बाद सियासी घमासान मच गया था। इस मसले को लेकर भाजपा जहां फ्रंट फुट पर खेल रही है तो आप बचाव की मुद्रा में दिखाई पड़ रही है।
जबकि बीते लोकसभा चुनाव में आप नेता दक्षिणी दिल्ली के भाजपा सांसद को पूर्वांचल विरोधी बता कर फ्रंट फुट पर खेल रहे थे। लेकिन अब भाजपा नेता पूर्वांचल के लोगों को लामबंद करने का कोई मौका नहीं छोड़ रहे हैं।
भाजपा के सभी नेता इन दिनों आम आदमी पार्टी को पूर्वांचल विरोधी ठहराने में जुटे है। पूर्वांचल से जुड़े भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष मनोज तिवारी दो कदम आगे बढ़कर विपक्षी पार्टी पर निशाना साध रहे हैं। पूर्व प्रदेश अध्यक्ष विजय गोयल व विजेंद्र गुप्ता अपने-अपने कैंप के साथ अभियान छेड़े हुए हैं।
भाजपा नेताओं में इन दिनों पूर्वांचल हितैषी बनने की होड़ मची है। ऐसा इसलिए भी माना जा रहा है कि दिल्ली का राजनीतिक समीकरण बदल गया है। पहले राजनीतिक पार्टियों का फोकस पंजाबी और वैश्य समुदाय के मतदाताओं पर होता था। अब उनका ध्यान पूर्वांचली वोटरों पर हो गया है।
वर्तमान में दिल्ली की 70 विधानसभा सीटों से 27 पर पूर्वांचल के वोटर निर्णायक भूमिका में हैं। अनधिकृत कॉलोनियों में भी इनकी बड़ी तादाद है। ऐसे में दोनों मुख्य पार्टियां की नजर भी इन्हीं मतदाताओं पर है। रणनीतिकारों की माने तो आगामी विधानसभा चुनाव की जंग में पूर्वांचल के वोटर बड़ी भूमिका में होंगे।
राजनीतिक पार्टियों के सर्वे को आधार माने तो 70 विधानसभा में 27 सीटें ऐसी है जहां पूर्वाचली मतदाताओं की संख्या 20-38 प्रतिशत है। सर्वे के अनुसार पूर्वी दिल्ली इलाके के 13 विधानसभा क्षेत्रों में पूर्वाचली वोटरों का दबदबा है तो पश्चिमी दिल्ली के पांच विधानसभा में हार-जीत में निर्णायक भूमिका में है।
इसी तरह उत्तरी दिल्ली के पांच विधानसभा और दक्षिणी दिल्ली के चार विधानसभा में पूर्वांचली के मतों का प्रतिशत 24-31 प्रतिशत है। ऐसे में राजनीतिक पार्टियां सियासी फायदा-नुकसान देख रही है।
पूर्वांचली को साधने में आप भी पीछे नहीं
पूर्वांचली की तादाद देखते हुए आम आदमी पार्टी भी इस वर्ग को साधने में जुटी है। इस वर्ग को साधने के लिए आप ने भी संजय सिंह को चुनाव प्रभारी बनाया है। पार्टी नेता भी बिहारियों पर मुख्यमंत्री के बयान के बाद अपने को पूर्वांचली समर्थक और मनोज तिवारी के पुराने वीडियो वायरल कर उन्हें पूर्वांचल विरोधी करार देने में जुटे है।
कभी शीला दीक्षित भी बनी थीं निशाना
पूर्व मुख्यमंत्री शीला दीक्षित भी पूर्वांचली के निशाने पर रह चुकी है। एक कार्यक्रम में दीक्षित ने भी विवादित बयान दिया था। इसके बाद इस बयान को लेकर विवाद हुआ था। दीक्षित को माफी तक मांगनी पड़ी थी और अपने आप को पूर्वांचल की बहू बताना पड़ा था।