हरियाणा-दिल्ली की सीमा से सटे बॉर्डर पर पुलिस की खास निगाहें रही। यहां थ्री लेयर सुरक्षा व्यवस्था का इंतजाम किया। खासकर, सिंधु बॉर्डर पर बैरिकेड लगाने के साथ-साथ डिवाइडर वाले पत्थरों को दिल्ली आने वाली सड़क पर लगा दिया। इन पत्थरों पर कटीले लोहे के तारों को भी लगाया गया। यहां रुक-रुककर वाहनों को निकाला गया। बॉर्डर पर वाटर कैनन, आंसू गैस के साथ पुलिस चुस्त रही। ड्रोन उड़ाकर पूरे हालात पर नजर रखी जा रही थी। टीकरी बॉर्डर, फरीदाबाद, गुरुग्राम, कापसहेड़ा, ढांसा बॉर्डर समेत कुछ अन्य जगहों की सुरक्षा व्यवस्था भी चुस्त रही।
माना जा रहा था कि यदि किसान किसी तरह दिल्ली में प्रवेश कर जाते हैं तो वह जंतर-मंतर पहुंचकर प्रदर्शन का प्रयास करेंगे। इसको देखते हुए जंतर-मंतर पर भी सुरक्षा के कड़े इंतजाम रहे। लोकल पुलिस के अलावा कई कंपनी संसद मार्ग थाने के बाहर डटी रही। कुछ किसान आप के पूर्व विधायक के साथ जंतर-मंतर पहुंच गए। पुलिस ने सभी को हिरासत में लिया। बाद में सभी को बसों से मंदिर मार्ग थाने ले जाया गया।
दिल्ली के सभी गुरुद्वारों खासकर पश्चिम दिल्ली में पुलिस की खास नजर रही। माना जा रहा था कि यदि कुछ किसान समय से पूर्व मंगलवार या बुधवार को दिल्ली आए होंगे तो वह गुरुद्वारों में शरण ले सकते हैं। ऐसे में पुलिस ने खास तौर पर तिलक नगर, राजौरी गार्डन के गुरुद्वारों पर नजर रखी। रकाबगंज, बंगला साहेब, शीशगंज गुरुद्वारे पर भी पुलिस का पहरा रहा। पुलिस सूत्रों का कहना है कि मजनूं का टीला गुरुद्वारे से 25 से 30 किसानों को हिरासत में भी लिया गया।
मार्च की वजह से दिल्ली आने वाले लोगों को जबरदस्त परेशानी का सामना करना पड़ा। शायद ही कोई ऐसा बॉर्डर रहा होगा जहां वाहनों की कतार न लगी हो। बॉर्डरों को सील कर पुलिस वाहनों की जांच कर रही थी। इस वजह से सभी बॉर्डर पर जाम लगा रहा। कुछ जगहों पर तो लोग पुलिस से उलझते भी दिखाई दिए। किसी को इलाज के लिए दिल्ली जाना था तो किसी को रिश्तेदार की मौत में जाना था। सिंघु बॉर्डर दोपहर के समय पुलिस ने लगभग बंद कर दिया। सभी बॉर्डर पर दिल्ली से बाहर जाने वाले रास्ते खुले हुए थे, लेकिन बिना जांच के दिल्ली की सीमा में प्रवेश नहीं दिया जा रहा था।
किसान आंदोलन के मद्देनजर पुलिस ने गुरुवार को गुरुग्राम को छावनी में तब्दील कर दिया। जिले की दिल्ली, फरीदाबाद, पलवल, नूंह, रेवाड़ी, झज्जर की सीमाओं को पूरी तरह से सील कर भारी पुलिस बल तैनात कर दिया। शहर में जगह-जगह नाकाबंदी कर किसानों को दिल्ली जाने से रोकने का प्रयास किया जाता रहा।
वहीं, राठीवास में स्वराज इंडिया के राष्ट्रीय अध्यक्ष व अखिल भारतीय किसान संघर्ष समन्वय समिति के प्रमुख योगेंद्र यादव व उनके समर्थकों को हिरासत में लिया, तो सेंटर ऑफ इंडियन ट्रेड यूनियन (सीटू) पदाधिकारियों ने प्रदर्शन करना शुरू कर दिया। इस पर पुलिस ने 6 पदाधिकारियों को हिरासत में लिया। वहीं, जिले के किसानों ने आंदोलन से दूरी बनाई, जिससे स्थिति शांतिपूर्ण रही।
आंदोलन के लिए किसानों के दिल्ली पहुंचने की सूचना से गुरुग्राम व दिल्ली पुलिस ने सरहोल बॉर्डर को सील कर दिया। इससे करीब 9 किलोमीटर लंबा जाम लग गया। पुलिस ने स्थिति से निपटने के लिए वाहनों का रूट डायवर्ट कर दिया। वहीं, जाम के कारण लोग अपने कार्यालय में भी देरी से पहुंचे।
अखिल भारतीय किसान संघर्ष समन्वय समिति ने किसान कानून के विरोध में दिल्ली पहुंचकर प्रदर्शन करने का आह्वान किया था। इस आंदोलन के तहत ही बुधवार रात से पुलिस ने दिल्ली सीमा समेत जिले की अन्य सीमाओं पर बेरिकेड लगाकर नाकाबंदी कर दी। बृहस्पतिवार सुबह से ही नाके पर पुलिस तैनात रही और संदिग्ध दिखाई देने वाले वाहनों को रुकवाकर जांच करती रही। इस कारण सुबह से ही सरहोल बॉर्डर पर जाम की स्थिति बनी रही। करीब 500 मीटर तक ही यह स्थिति बनी रही।