पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट ने गुरुवार को जुवेनाइल जस्टिस से कहा है कि वह फिर से इस पर विचार करे कि गुरुग्राम के स्कूल में मारे गए सात वर्षीय छात्र प्रिंस की हत्या के आरोपी नाबालिग छात्र पर वयस्कों की तरह केस चले या नाबालिग की तरह।
हत्यारोपी छात्र भोलू के वकील रूपिंदर खोसला ने बताया कि अदालत ने जेजेबी से कहा है कि वह इस पर नए तरीके से विचार करें कि आरोपी भोलू को वयस्क मानें या नाबालिग। इसके साथ ही खोसला ने ये भी कहा कि अभी कोर्ट का आदेश की विस्तृत कॉपी आनी बाकी है।
बता दें कि साल 2017 में गुरुग्राम के एक प्रतिष्ठित स्कूल में 8 सितंबर के दिन प्रिंस नाम के सात वर्षीय बच्चे की 16 वर्षीय भोलू नाम के छात्र ने हत्या कर दी थी। यह हत्या इसलिए की गई थी ताकि स्कूल में पीटीएम न हो और परीक्षा भी टल जाए। बता दें कि जेजे बोर्ड ने दिसंबर 2017 में इस मामले में फैसला सुनाया था कि आरोपी छात्र को वयस्क माना जाएगा।
मालूम हो कि साल 2015 में बने कानून के अनुसार 16-18 साल के बीच के वो नाबालिग जो जघन्य अपराधों में लिप्त पाए जाएंगे उन्हें वयस्क माना जाएगा। इस कानून के बनने के बाद से ही इस पर मतभिन्नता रही है। कुछ वकील मानते हैं कि आरोपी को एक मौका मिलना चाहिए अपने को सुधारने का। वहीं कुछ वकील मानते हैं कि कानून सही है जघन्य अपराध करने वाले को सजा मिलनी ही चाहिए।
आरोपी ने हाईकोर्ट में दी अपनी अपील में कहा है कि सीबीआई ने कानूनी प्रक्रिया नहीं अपनायी और इस मामले से सीबीआई जुड़ी भी नहीं थी। उनका दावा है कि आरोपी को अपनी बात रखने का पूरा मौका नहीं दिया।