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दुष्कर्म की झूठी शिकायत पर सजा: दृष्टिहीन बच्चों के स्कूल में सेवा करे महिला, आरोपी 50 पेड़ लगाए और देखभाल करे

Mon, 01 Aug 2022 07:34 PM IST
प्रशांत कुमार न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

समझौता याचिका में महिला ने माना कि याचिकाकर्ता ने उसकी सहमति के बिना कोई शारीरिक संबंध स्थापित नहीं किया। उनके बीच पैसों का विवाद था और उसने गलत सलाह और गुमराह करने के तहत प्राथमिकी दर्ज  करवाई। 
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high court - फोटो : फाइल फोटो
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विस्तार
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हाईकोर्ट ने पैसों के विवाद को लेकर दुष्कर्म का मामला दर्ज करवाने वाली महिला के रवैये को गंभीरता से लेते हुए उसके आचरण को अनुचित करार दिया है। अदालत ने आरोपी व महिला के बीच हुए समझौते के आधार पर प्राथमिकी तो रद्द कर दी, लेकिन महिला को दो माह तक दृष्टिहीन बच्चों के स्कूल ऑल इंडियन कन्फेडरेशन ऑफ द ब्लाइंड्स में सेवा करने का निर्देश दिया है। इतना ही नहीं अदालत ने आरोपी बनाए गए व्यक्ति को भी 50 पेड़ लगाने और इन पेड़ों की पांच साल तक देखभाल करने का निर्देश दिया है।

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न्यायमूर्ति जसमीत सिंह ने प्राथमिकी को खारिज करते हुए कहा कि उनका मानना है कि कथित पीड़िता का आचरण अनुचित है और कानून की प्रक्रिया का दुरुपयोग है। शिकायतकर्ता ने भी माना है कि वह मानसिक अवसाद से गुजर रही थी, जिसके परिणामस्वरूप गुमराह और गलत सलाह के तहत उसने प्राथमिकी दर्ज करवाई। 

अदालत ने कहा कि झूठी प्राथमिकी के बाद न्यायालय का कीमती समय बर्बाद हुआ है। ऐसे में महिला को दो महीने की अवधि के लिए सप्ताह में पांच दिन, प्रत्येक दिन तीन घंटे स्कूल में समाज सेवा करनी होगी। वहीं, याचिकाकर्ता को रोहिणी अंचल में जांच अधिकारी के परामर्श से 50 पेड़ लगाने का भी निर्देश दिया है।
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कहा कि प्रत्येक पेड़ की नर्सरी तीन साल की होगी और याचिकाकर्ता को आवंटित पेड़ों की पांच साल तक देखभाल करनी होगी। दोनों पक्षों ने समझौते के आधार पर प्राथमिकी रद्द करने का आग्रह किया था। महिला ने प्राथमिकी में कहा कि आरोपी ने उसे शराब पिलाई, जिसके बाद वह बेहोश हो गई और कथित तौर पर दुष्कर्म किया गया। 
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