लोकसभा चुनाव में चायवाला और झाडूवाला के बीच अब पंक्चर वाले और पावभाजी वाले उम्मीदवारों ने भी इंट्री मारी है। इससे मुकाबला और दिलचस्प होने वाला है।
चुनाव से नामांकन वापसी के अंतिम दिन उम्मीद से परे उन लोगों ने अपना नाम वापस नहीं लिया, जिनके नामांकन वापसी की संभावना जताई जा रही थी।
पूरे जज्बे और जोश के साथ इन लोगों ने संवैधानिक प्रक्रिया के तहत अपना चुनाव चिन्ह लिया और इसके बाद एक अपनी पंक्चर की दुकान पर पहुंच गया तो दूसरा चौक पर पावभाजी बनाने में जुट गया।
दिग्गजों को टक्कर देगा ये पंक्चर वाला
गुड़गांव लोकसभा से निर्दलीय प्रत्याशी के तौर पर नामांकन भरने वाले सराय अला वर्दी के रहने वाले अब्दुल लतीफ की मियां जी ऑटो मोबाइल के नाम से पंक्चर की दुकान है। इसी दुकान की आमदनी से उनका परिवार चलता है।
कभी स्कूल न जाने वाले लतीफ अपने को किसी से कम पढ़ा लिखा नहीं मानते हैं। पांच बेटे और चार बेटियों के पिता लतीफ ने बुधवार को चुनाव चिन्ह लेने जाने के लिए अपने किसी दोस्त से सेंट्रो कार मांगी थी।
यह अलग बात है कि उनके गैराज में 1980 मॉडल की एक कार खराब खड़ी है, जिसे वह जल्द ही दुरुस्त कराने की सोच रहे हैं। लतीफ को चुनाव चिन्ह 'फूलों की टोकरी' मिला है।
'शटल कॉक' से खेलेगा ये पावभाजी वाला
गुड़गांव सीट से ही दूसरे निर्दलीय उम्मीदवार कुसेशर भगत हैं। ये रोजाना शाम चार बजे से रात दस बजे तक पावभाजी का ठेला लगाते हैं।
बुधवार को वह चुनाव चिन्ह लेने तो गए लेकिन साथ ही उन्हें इस बात की भी जल्दी थी कि बेटी को स्कूल से घर लाने के बाद उन्हें ठेला भी लगाना है। नौवीं तक पढ़ाई करने वाले भगत यहां बीस साल से किराए के मकान में रह रहे हैं। उनके तीन बच्चे हैं।
भगत ने बताया कि पूरे गुड़गांव का विकास उनके सामने हुआ है और वह इसके हर रंग से वाकिफ हैं। फिलहाल भगत अपनी बाइक से पूरी लोकसभा क्षेत्र में प्रचार करने की योजना बना रहे हैं। उनके पास कार नहीं है। भगत को चुनाव चिन्ह के तौर पर 'शटल कॉक' मिला है।