विकास के नाम पर पेड़ों की कटाई को लेकर शहर में एक बड़े जन आंदोलन की तैयारी हो रही है। न्यू गुरुग्राम के आरडब्ल्यूए हरियाली बचाने के लिए एकजुट हो रहे हैं। जल्द ही लोग सड़कों पर उतरकर इसका विरोध करेंगे और वन एवं लोक निर्माण मंत्री को ज्ञापन देकर पेड़ नहीं काटने की अपील की जाएगी। वहीं, कुछ पर्यावरणविद् दिल्ली के फैसले को नजीर बनाते हुए नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल में जाने की तैयारी कर रहे हैं।
बता दें कि अतुल कटारिया चौक पर अंडरपास और फ्लाईओवर के निर्माण करने के लिए करीब 1300 पेड़ काटने की तैयारी की जा रही है। इसमें हुडा के ग्रीन बेल्ट में पड़ने वाले 600 पेड़ों को वन विभाग ने काटने की अनुमति दे दी है और बाकी 700 पेड़ों के लिए अनुमति का केंद्रीय पर्यावरण एवं वन मंत्रालय से मंजूरी का इंतजार किया जा रहा है। इसके साथ ही सेक्टर-4 में बाल भवन के निर्माण में 28 पेड़ों को काटने और 78 को ट्रांसप्लांट करने की अनुमति मिल चुकी है। हालांकि विशेषज्ञों की मानें तो ट्रांसप्लांट के बाद पेड़ों का मरना तय है।
सिटीजन फॉर क्लीन एयर के बैनर तले लोग इकट्ठा हो रहे हैं। इसमें सोशल मीडिया के जरिये लोगों को एकजुट किया गया है। इसके साथ ही एक ड्राफ्ट तैयार कर वन मंत्री को देने का प्रस्ताव भी तैयार किया गया है। जिसमें विभिन्न आरडब्ल्यूए, विशेषज्ञ और पर्यावरणविद् अपने सुझाव के साथ फ्लाईओवर और अंडरपास के निर्माण के साथ पेड़ों को बचाने की बात बताएंगे। वहीं, कई लोग विकास के नाम पेड़ों की बलि देने के बिल्कुल खिलाफ हैं।
सिटीजन फॉर क्लीन एयर की संयोजक पर्यावरणविद् रूचिका सेठी का कहना कि विकास तो तब लोगों के लिए फायदेमंद होगा, जबकि व्यक्ति स्वस्थ सांस ले सकेगा। पेड़ों को इस तरह काटना मुनासिब नहीं है। पेड़ों की कटाई नहीं करने की मांग को लेकर एक ज्ञापन दिया जाएगा। इसके साथ ही ऑनलाइन मुहिम चलाकर जागरूक किया जाएगा। पर्यावरणविद् विवेक कंबोज का कहना है कि इस तरह पेड़ों की कटाई ठीक नहीं है। इसके लिए दिल्ली के फैसले को नजीर बनाते हुए ग्रीन ट्रिब्यूनल में अपील की जाएगी।