दिल्ली में चल रहे राजनीतिक संकट के कारण आम जनता का हाल बेहाल है। केजरीवाल सरकार के इस्तीफे के बाद से लगे राष्ट्रपति शासन में लोगों की समस्याएं दूर होने का नाम नहीं ले रही हैं।
देश्ाभर में चुनावी माहौल और दिल्ली में दोबारा चुनाव की संभावना के चलते दिल्ली की जनता की सुनने वाला फिलहाल कोई नहीं है। दिल्ली की जितने भी विधायक हैं फिलहाल चुनाव प्रचार के लिए दिल्ली से बाहर हैं ऐसे में आम जनता की सुनने वाला कोई नहीं है।
जो कंप्लेंट आ भी रही हैं, उनमें ज्यादातर ऑनलाइन हैं। दिल्ली सचिवालय में फरियाद लेकर आने वालों को उंगली पर गिना जा सकता है।
केजरीवाल सरकार ने शुरू किए थे ये सिस्टम
आम आदमी पार्टी की अगुवाई वाली सरकार में जब मुख्यमंत्री अरविंदर केजरीवाल ने जनता दरबार की घोषणा की थी तो उमड़ी भीड़ देखकर लगता था कि समस्याएं बहुत हैं। बाद में जनता दरबार तो बंद हो गया और पब्लिक ग्रिवेंस मॉनिटरिंग सिस्टम (पीजीएमएस) शुरू किया गया।
दिल्ली सचिवालय में एक हेल्प डेस्क बनाई गई। महज 49 दिन की केजरीवाल सरकार में 9000 शिकायतें मिली थीं। अधिकारी भी सक्रिय दिखे लेकिन अब हालात उलट गए हैं।
उसके बाद अभी तक करीब 15 हजार फरियाद ही मिली हैं, जिनमें से 15 फीसदी मामले अभी भी लंबित हैं।
दिल्ली को खल रही सरकार की कमी!
मुख्यमंत्री कार्यालय में पीजीएमएस का जिम्मा संभालने वाले रवि दधीच ने गत दिनों हुई बैठक में यह जानकारी दी है कि लंबित मामलों में बड़ी भागीदारी दिल्ली पुलिस, जल बोर्ड, डीडीए व एमसीडी की है।
सिस्टम में ज्यादातर कंप्लेंट ऑनलाइन आ रही हैं। दिल्ली सरकार के अधिकारी स्वीकारते हैं कि मुख्यमंत्री नहीं होने के कारण लोगों के मन में यह रहता है कि शिकायतें नहीं निपटाई जाएंगी, इसलिए इनमें कमी आई है।
ऑनलाइन शिकायत दर्ज कराई है तो उसके निपटारे से संबंधित जानकारी मोबाइल पर मिले अपने आवेदन से संबंधित नंबर को डालकर चेक कर सकते हैं। संबंधित विभाग के अधिकारी ने शिकायत पर क्या कार्रवाई की व निपटारा कहां तक हुआ, यह सब आवेदक देख सकता है। यह सुविधा ‘आप’ सरकार के बाद दी गई है।