जनहित याचिका उन लोगों के लिए दायर की जानी चाहिए जो कोर्ट नहीं आ सकते। हाईकोर्ट ने यह टिप्पणी एनजीओ सोशल जूरिस्ट की जनहित याचिका खारिज करते हुए की है।
एनजीओ ने उत्तरी दिल्ली नगर निगम व पूर्वी दिल्ली नगर निगम के स्कूलों के अध्यापकों को बकाया वेतन का भुगतान करने का निर्देश देने की मांग की थी।
मुख्य न्यायाधीश डीएन पटेल व न्यायमूर्ति सी. हरि शंकर की खंडपीठ ने जनहित याचिका खारिज करते हुए कहा कि शिक्षक कोर्ट आ सकते हैं और जब भी उन्हें वेतन नहीं मिलता वह कोर्ट आते हैं।
वह खुद कानून के मुताबिक कार्रवाई की मांग कर सकते हैं। ऐसे हालात में इस जनहित याचिका पर आदेश जारी करने का कोई कारण नजर नहीं आता।
खंडपीठ ने याचिका खारिज करते हुए कहा कि जनहित याचिका ऐसे लोगों के लिए दायर की जानी चाहिए जो कमजोर तबके से हैं या फिर पढ़े लिखे नहीं हैं। जो जानकारी के अभाव में कोर्ट नहीं आ सकते। ऐसे लोगों के लिए दायर जनहित याचिकाएं कानून में सुनवाई योग्य हैं।
एनजीओ ने अधिवक्ता अशोक अग्रवाल के जरिए याचिका दायर कर दोनों निगमों के शिक्षकों व डॉक्टरों को मार्च व अप्रैल माह के वेतन का भुगतान करने का निर्देश देने की मांग की थी। इन शिक्षकों व डॉक्टरों को फरवरी माह में वेतन के रूप में चार व आठ रुपए मिले थे।