न्यायालय ने कहा- यहां कानून की क्लास नहीं चला सकते
अमर उजाला ब्यूरो
नई दिल्ली। दिल्ली हाईकोर्ट ने झंडेवालान मंदिर प्रबंधन की ओर से भक्तों की देव दर्शन पर लगाए गए प्रतिबंधों को चुनौती देने वाली जनहित याचिका को सुनने से इनकार कर दिया। मुख्य न्यायाधीश देवेंद्र कुमार उपाध्याय की पीठ ने कहा कि मंदिर समिति राज्य या सार्वजनिक कर्तव्य निभाने वाली संस्था नहीं है।
मुख्य न्यायाधीश ने याचिकाकर्ता से कहा कि रिट केवल राज्य के विरुद्ध जारी की जा सकती है या किसी ऐसे प्राधिकरण के विरुद्ध जो सार्वजनिक कर्तव्य निभाता हो। मंदिर समिति सार्वजनिक कर्तव्य नहीं निभाती। न्यायाधीश ने आगे कहा कठिनाई यह है कि मैं यहां कानून की क्लास नहीं चला सकता।
याचिकाकर्ता ने दावा किया था कि बचपन से मंदिर जा रहे हैं और प्रबंधन ने कुछ लोगों को ही देव दर्शन की अनुमति दी है, जबकि अधिकांश भक्तों को रोका जा रहा है। इससे समानता का अधिकार और धर्म की स्वतंत्रता का उल्लंघन हो रहा है। अदालत ने स्पष्ट किया कि मंदिर प्रबंधन को सार्वजनिक स्थान मान लेने से वह सार्वजनिक कर्तव्य निभाने वाला नहीं हो जाता। न्यायालय ने याचिकाकर्ता को सिविल सूट दायर करने की सलाह दी।