मजदूरों को हो रही परेशानी को देखते हुए अब मजदूर संगठन सड़कों पर उतरने की तैयारी कर रहे हैं। 20 मई को पूरे देश में विरोध प्रदर्शन किया जाएगा।
केंद्र और राज्य सरकारों से मांग की जाएगी कि मजदूरों को मार्च और अप्रैल महीने का वेतन देना सुनिश्चित कराया जाए। इसके अलावा इस समय श्रमिक जहां भी फंसे हैं, उन्हें वहां से उनके घरों तक भेजने की उचित व्यवस्था की जाए।
भारतीय मजदूर संघ के दिल्ली प्रांत अध्यक्ष अनीश मिश्रा ने अमर उजाला से कहा कि लॉकडाउन के दौरान पूरे देश में श्रम कानूनों लेबर लॉ को सस्पेंड करने का एक तरफा फैसला कर लिया गया। मजदूरों को मार्च और अप्रैल महीने का वेतन भी नहीं दिया गया है। वे सभी सरकारों से यही मांग करेंगे कि उन्हें दो महीने का पूरा वेतन दिया जाए।
भारतीय मजदूर संघ ने मांग की है कि देश के अलग-अलग हिस्सों में इस समय भी लाखों मदूर फंसे हुए हैं और भयंकर संकट का सामना कर रहे हैं। हर राज्य सरकार इन्हें तत्काल इनके घरों को भेजने की व्यवस्था करे। संबंधित राज्य इनके खाने और रहने की उचित व्यवस्था करें।
गृह राज्यों से अनुरोध किया जा रहा है कि इन मजदूरों के लिए तात्कालिक तौर पर रोजगार की व्यवस्था करें, ताकि वे आगे की जिंदगी को सामान्य तरीके से व्यतीत कर सकें। मजदूर संगठन श्रम कानूनों को दुबारा लागू करने, मजदूरों के काम के घंटे न बदले जाने की अपील भी करेंगे।
वहीं, एआईयूटीसी की महामंत्री अमरजीत कौर ने कहा कि केंद्र सरकार मजदूरों के लिए किसी भी तरह के राहत पैकेज की घोषणा नहीं कर रही है। वित्तमंत्री राहत के नाम पर केंद्र सरकार की उसी नीति को आगे बढ़ा रही हैं जिनके तहत देश की इकाइयों को प्राइवेट हाथों में बेचा जा रहा है। ़
उन्होंने कहा कि इन इकाइयों को प्राइवेट हाथों में बेचने से गरीबों और मजदूरों के हितों को चोट पहुंचेगी। सरकार लेबर लॉ को सस्पेंड कर प्राइवेट कंपनियों को इसके लिए खुली छूट भी दे रही है।
दिल्ली मदद के लिए उतरी
वहीं, दिल्ली सरकार मजदूरों के लिए लगातार योजनाएं आगे बढ़ा रही है। पिछले महीने में मजदूरों को पांच-पांच हजार रुपये की आर्थिक मदद दी गई थी। सरकार ने घोषणा की है कि वह इस माह भी सभी रजिस्टर्ड मजदूरों को पांच-पांच हजार रुपये की मदद देगी। इसके लिए ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन कराया जा सकेगा।
दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने घोषणा की है कि वे अब तक 33 से ज्यादा ट्रेनों और सैकड़ों बसों के जरिए 47,000 मजदूरों को उनके घरों को भेज चुके हैं। अगर और भी मजदूर अपने घर जाना चाहेंगे तो सरकार इसकी व्यवस्था करेगी।
लेकिन जो लोग यहां रहना चाहेंगे, सरकार उनके लिए रहने और खाने का पूरा इंतजाम करेगी।