महिला एवं बाल विकास विभाग की आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं ने हरियाणा सरकार के 14 जून को जारी तुगलकी आदेश के विरोध में रविवार को कमला नेहरू पार्क में जमकर प्रदर्शन किया। उन्होंने आदेश की प्रतियां जलाईं। उनका आरोप है कि सरकार उन्हें बदनाम करने पर तुली हुई है।
बता दें कि आदेश में कहा गया है कि समेकित बाल विकास योजना विभाग की महत्वपूर्ण योजना के अंतर्गत गर्भवती माताओं, धात्री महिलाओं व छह माह से लेकर 6 साल तक के बच्चे को 300 दिन राशन के साथ विभाग की अन्य योजनाओं का लाभ आंगनबाड़ी के माध्यम से उपलब्ध करवाया जाता है। जिसको आंगनबाड़ी कार्यकर्ता गंभीरता से नहीं लेती हैं। छोटी-मोटी मांगों को आधार बनाकर प्राय: धरना, प्रदर्शन व हड़ताल पर रहती हैं। जिसकी वजह से परियोजनाओं से मिलने वाले लाभ पर कुप्रभाव पड़ रहा है।
आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं का आरोप है कि सरकार उन्हें बदनाम करने पर तुली हुई है। जबकि सच्चाई यह है कि सरकार छह महीनों से राशन की आपूर्ति ही नहीं कर पा रही है। दो साल से आंगनबाड़ी केंद्रों का किराया बकाया है। रजिस्टरों व अन्य कागजी सामग्री की आपूर्ति भी बंद कर राखी है। धरना-प्रदर्शन व हड़ताल करने का कार्यकर्ताओं को कोई शौक नहीं है। यदि सरकार समय पर उनकी सुनवाई कर सभी वादे पूरे कर दे तो उन्हें काम करने में कोई परेशानी है।
आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं का कहना है कि 45वें श्रम सम्मेलन में सभी योजना कर्मियों को पक्का मानकर उन्हें स्थायी करने की अनुशंसा की गई है। मगर सरकार न तो न्यूनतम वेतन दे रही है और न ही कर्मचारी बनाने की कोई कोशिश ही कर रही है।
कार्यकर्ताओं ने कहा कि सरकार ऐसे असंवैधानिक आदेश देना बंद करें। आंगनवाड़ी केंद्रों की मूलभूत सुविधाएं बढ़ाए व कार्यकर्ताओं के लंबित मांगों पर गौर करे। उन्होंने चेतावनी दी कि आगामी 10 जुलाई को आंगनबाड़ी कार्यकर्ता व सहायिका देश भर में मांग दिवस के रूप में मनाएंगी।
रविवार की प्रतिरोध कार्यवाही को सीआईटीयू के राज्य अध्यक्ष कामरेड सतवीर सिंह, जिला कोषाध्यक्ष एसएल प्रजापति, जनवादी महिला समिति जिला सचिव का. ऊषा सरोहा, एमईएसएल ठेका मजदूर यूनियन से बलबीर सिंह व अनिल कुमार समेत अन्य आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं ने भाग लिया। प्रदर्शन की अध्यक्षता आंगनबाड़ी की वरिष्ठ कार्यकर्ता सुशीला ने की। संचालन जिला सचिव सरस्वती ने किया।