बार काउंसिल ऑफ इंडिया के अध्यक्ष मनन मिश्रा
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तीस हजारी कोर्ट में पुलिस और वकीलों के बीच हुए विवाद और हड़ताल के मामले में बार काउंसिल ऑफ इंडिया (बीसीआई) ने नाराजगी जताई है। बीसीआई के अध्यक्ष मनन मिश्रा ने कहा कि उपद्रवी तत्वों को बख्शने से लगातार संस्था की छवि खराब हो रही है।
उन्होंने कहा कि वकीलों को प्रदर्शन बंद कर देना चाहिए। इससे बीसीआई की बदनामी हो रही है।इसके साथ ही उन्होंने सभी बार संगठनों को पत्र लिखकर गुंडागर्दी में शामिल वकीलों की पहचान कर बुधवार तक जानकारी मांगी है।
बीसीआई अध्यक्ष ने कहा कि बार संगठनों की निष्क्रियता ऐसे वकीलों का हौसला बढ़ाती है। साकेत कोर्ट के वकीलों द्वारा बाइक सवार पुलिसवाले, ऑटो ड्राइवर व आम लोगों से मारपीट करने की घटना बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है। इसे बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।दिल्ली हाईकोर्ट के शानदार कदम के बावजूद कुछ वकीलों ने आचरण ने हमें विचलित किया है।
मिश्रा ने यह भी कहा कि अदालत से अनुपस्थित रहने या हिंसा का सहारा लेने से कुछ हासिल नहीं होगा, बल्कि इससे हम अदालतों, न्यायाधीशों, सीबीआई व सतर्कता विभाग की सहानुभूति खो रहे हैं। आम लोगों की राय भी हमारे खिलाफ जा रही है।इसके नतीजे बेहद खतरनाक हो सकते हैं।गुंडागर्दी और हिंसा की बार काउंसिल में कोई जगह नहीं है। इसे तुरंत रुकना चाहिए।
बार काउंसिल अध्यक्ष ने बार एसोसिएशन को लिखे पत्र में वकीलों से सोमवार को पारित किए प्रस्ताव वापस लेने के साथ तुरंत काम पर वापस लौटने की अपील की है। उन्होंने चेतावनी भी दी है कि इस पूरे प्रकरण से बीसीआई अपना समर्थन वापस लेगी।बार संगठनों का प्रस्ताव निरर्थक और बिना किसी कानूनी आधार वाला है ।
बता दें कि पुलिस और वकीलों में हुए विवाद के बाद सोमवार को वकीलों ने दिल्ली की छह जिला अदालतों में पूरे काम नहीं किया। साथ ही वकीलों ने पुलिसकमिर्यों की गिरफ्तारी नहीं होने पर अनिश्चितकालीन हड़ताल का प्रस्ताव पास किया था।जिसे बीसीआई ने गलत ठहराते हुए वापस लेने के लिए कहा है।