राष्ट्रपति द्वारा अयोग्य घोषित होने वाले आप विधायकों में से एक अलका लांबा ने कहा कि यह बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है कि राष्ट्रपति ने इतनी जल्दबाजी में और हमें अपना पक्ष रखे बिना फैसला सुना दिया। केंद सरकार ने अपने फायदे के लिए संवैधानिक संस्था का इस्तेमाल किया है। हमें न्यायपालिका पर भरोसा है। सुप्रीम कोर्ट और हाईकोर्ट के दरवाजे हमारे लिए खुले हैं।
जबकि भाजपा नेता मीनाक्षी लेखी ने कहा कि राज्य सभा के लिए उम्मीदवारों का नामांकन प्रकिया संपन्न होना इस बात का साफ संकेत करता है कि चुनाव आयोग अपने ढंग से काम कर रही है इसलिए अरविंद केजरीवाल का चुनाव आयोग पर आरोप लगाने का कोई मतलब नहीं है। ये सभी संवैधानिक संस्थाएं है और इनके लिए कानून का पालन करना अनिवार्य है।