- डूसू पर काबिज होने के लिए एनएसयूआई ने घोषणा पत्र में खोला 19 वादों का पिटारा
अमर उजाला ब्यूरो
नई दिल्ली। दिल्ली विश्वविद्यालय छात्र संघ चुनाव का किला फतह करने के लिए एनएसयूआई ने इस बार छात्रों को किफायती आवास और रियायती मेट्रो पास से लेकर चौबीस घंटे लाइब्रेरी और कैंटीन में स्वच्छ खाना-पानी की सुविधा देने पर दावा किया है। डूसू में वापसी के लिए संगठन ने कैंपस में मूलभूत सुविधाओं, महिला सुरक्षा, कैंपस में शांति पर भी फोकस किया है।
एनएसयूआई ने डूसू चुनाव के लिए सोमवार को अपना घोषणा पत्र जारी किया। एकाउंटेबल डीयू, एकाउंटेबल डूसू नाम से जारी घोषणा पत्र में छात्र कल्याण, शिक्षा, सुरक्षा, बुनियादी सुविधाओं, मानसिक स्वास्थ्य, सामाजिक न्याय और रोजगार से जुड़े 19 मुद्दों को शामिल किया है। संगठन ने छात्र राजनीति को विश्वविद्यालय प्रशासन की जवाबदेही और छात्र अधिकारों से जोड़ते हुए कई लंबित मांगों को चुनावी मुद्दा बनाने की कोशिश की है।
एनएसयूआई मुख्यालय में राष्ट्रीय अध्यक्ष विनोद जाखड़ की मौजूदगी में घोषणापत्र जारी किया गया। इस दौरान डूसू चुनाव में संगठन के चारों उम्मीदवार मौजूद रहे। जाखड़ ने कहा कि घोषणापत्र छात्रों के सुझावों के आधार पर तैयार हुआ है। घोषणापत्र में छात्रों के लिए किफायती मेट्रो पास की व्यवस्था और पीजी व किराये के मकानों के लिए सत्यापित डीयू पोर्टल बनाने का वादा किया गया है। फीस का वित्तीय बोझ कम करने के लिए आवश्यक कदम उठाने का भी प्रस्ताव रखा गया है।
घोषणा पत्र की खास बातें
डीयू में पांच दिन की पढ़ाई हो
एनएसयूआई ने डीयू में पांच दिन की पढ़ाई व्यवस्था लागू करने की मांग की है। सोमवार से शुक्रवार तक कक्षाएं हो जिससे कि छात्र अपने मानसिक स्वास्थ्य व अन्य गतिविधियों पर भी ध्यान दे सकें। वहीं एनईपी के तहत लागू चार वर्षीय स्नातक कार्यक्रम को वापस लेने की भी मांग घोषणा पत्र में रखी गई है।
24 घंटे लाइब्रेरी और कैंटीन
छात्रों की रोजमर्रा की जरूरतों से जुड़े मुद्दों को भी घोषणापत्र में प्रमुखता दी गई है। एनएसयूआई ने चौबीस घंटे रीडिंग लाइब्रेरी और रियायती चौबीस घंटे कैंटीन की सुविधा का वादा किया है। इसके अलावा कैंपस में वाई-फाई स्वच्छ पेयजल, बेहतर कक्षाएं और छात्र हितैषी बुनियादी ढांचे के विकास की बात कही गई है। छात्राओं के लिए हर महीने दो दिन के मासिक धर्म अवकाश, यौन उत्पीडऩ के खिलाफ जीरो टॉलरेंस नीति और लैंगिक संवेदनशीलता को बढ़ावा देने का भी प्रस्ताव है। मानसिक स्वास्थ्य के लिए कैंपस में सुलभ काउंसलिंग सेवाएं उपलब्ध कराने की बात कही गई है।
छात्रवृत्ति से रोजगार तक
घोषणापत्र में एससी-एसटी छात्रों के लिए छात्रवृत्ति और वित्तीय सहायता के विस्तार, इंटर्नशिप, करियर मार्गदर्शन और रोजगार के अवसरों तक बेहतर पहुंच सुनिश्चित करने का वादा किया गया है। खेल सुविधाओं को मजबूत करने और स्नातक छात्रों के लिए खेल के अधिक अवसर उपलब्ध कराने की बात भी शामिल है। परीक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता के लिए मुफ्त मूल्यांकन और पुनर्मूल्यांकन की व्यवस्था तथा छात्रों को उनके अधिकारों और कानूनी उपायों की जानकारी के लिए कानूनी जागरूकता सेमिनार और कैंप आयोजित करने का प्रस्ताव रखा गया है।
क्या हुआ तेरा वादा से प्रशासन को घेरा
घोषणापत्र के साथ एनएसयूआई ने क्या हुआ तेरा वादा नाम से अभियान भी शुरू किया। इसमें सुरक्षित और किफायती छात्रावासों की कमी, मेट्रो पास की लंबित मांग, कैंपस सुविधाओं की स्थिति, छात्र अभिव्यक्ति और प्रदर्शनकारी छात्रों के साथ व्यवहार जैसे मुद्दों पर विश्वविद्यालय प्रशासन से सवाल किए गए हैं।