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Delhi NCR News: 22 हजार से ज्यादा जगह खाली, फिर भी 9,946 बुजुर्गों की पेंशन अटकी

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16,194 आवेदनों में 61 फीसदी अटके, 45 दिन में निपटारे की समय सीमा भी बेअसर, अब सात दिन में लंबित मामले निपटाने के दिए निर्देश
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अमर उजाला ब्यूरो

नई दिल्ली।
दिल्ली में वृद्धावस्था पेंशन के लिए आवेदन करने वाले हजारों बुजुर्गों को सरकारी मदद का इंतजार है। विभाग के पास नए लाभार्थियों को पेंशन देने के लिए पर्याप्त जगह उपलब्ध होने के बावजूद आवेदनों के निपटारे की रफ्तार सुस्त है। 8 सितंबर तक की विभागीय रिपोर्ट के मुताबिक, इस साल प्राप्त 16,194 आवेदनों में से 9,946 अब भी लंबित हैं। यानी करीब 61 फीसदी आवेदनों पर फैसला होना बाकी है। इनमें 6,150 आवेदन स्वीकृत और 98 खारिज किए गए हैं।



मामले की गंभीरता इस बात से समझी जा सकती है कि विभाग के पास पेंशन देने के लिए 22,512 जगह खाली हैं। कुल 38,706 पेंशन की जगह में से 16,194 का इस्तेमाल हो चुका है। इसके बावजूद पात्र बुजुर्गों के आवेदनों पर निर्णय नहीं हो पा रहा है। ऐसे में सवाल उठ रहा है कि जब पेंशन के लिए जगह उपलब्ध है तो आवेदन महीनों तक लंबित क्यों रखे जा रहे हैं।
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वृद्धावस्था पेंशन के आवेदन के निपटारे के लिए 45 दिन की समयसीमा तय है। लेकिन मंत्री कार्यालय की ओर से 10 सितंबर को जारी पत्र में सामने आया कि 50 फीसदी से अधिक आवेदन इस निर्धारित अवधि में स्वीकृत नहीं हुए। पत्र में देरी को गंभीरता से लेते हुए संबंधित अधिकारियों की जिम्मेदारी तय करने और जरूरत पड़ने पर कार्रवाई करने के निर्देश दिए गए हैं।


खास बात यह है कि लंबित आवेदनों को लेकर विभाग को पहले भी चेताया जा चुका है। 3 जुलाई को लंबित वृद्धावस्था पेंशन आवेदनों का तत्काल निपटारा करने के साथ हर सप्ताह अनुपालन रिपोर्ट देने के निर्देश दिए गए थे। इसके बावजूद दो महीने बाद भी हजारों आवेदन लंबित मिले। इससे निर्देशों के पालन और विभागीय निगरानी व्यवस्था पर भी सवाल खड़े हो रहे हैं।
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अप्रैल में भेजे 806 आवेदन भी नहीं निपटे


मंत्री कार्यालय से विभाग को भेजे गए मामलों में भी देरी की तस्वीर सामने आती है। 10 अप्रैल को 806 वृद्धावस्था पेंशन आवेदन विभाग को भेजे गए थे। दस्तावेज के अनुसार, उस समय तक इनमें एक भी आवेदन का निपटारा नहीं हुआ था। इन मामलों के लिए अलग से रिक्तियां खोलने की जरूरत बताई गई थी। इस पर मंत्री कार्यालय ने स्पष्ट किया था कि रिक्तियां खोलना विभाग के अधिकार क्षेत्र में आता है। अब मंत्री कार्यालय ने लंबित आवेदनों को सात दिन में निपटाने का निर्देश दिया है। साथ ही देरी के लिए अधिकारियों की जिम्मेदारी तय करने को कहा गया है।
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