दिन ब दिन महिलाओं, बच्चियों के साथ दुष्कर्म, यौन उत्पीड़न और अन्य गम्भीर अपराधों के बढ़ते ग्राफ ने महिलाओं की सुरक्षा को लेकर यक्ष प्रश्न खड़ा कर दिया है।
रेप जैसी घृणित घटनाओं को अंजाम देने वाले संकुचित मानसिकता के लोग महिलाओं को कमजोर समझने की भूल कर बैठते हैं। ऐसे लोगों को मुंह तोड़ जवाब दे रही हैं देश की ये मशहूर बॉबी जासूस।
32 वर्षीय भावना पालिवाल दिल्ली में तेजस डिटेक्टिव एजेंसी की फाउंडर मेंबर हैं। इस दिलेर लेडी जासूस के लिए अपराधियों से दो-दो हाथ करना कोई बड़ी बात नहीं है। हर वक्त कैमरा फोन से लैस और बेश बदलने में माहिर भावना ने मानव तस्करी में लिप्त अपहरणकर्ताओं से एक लड़की को मुक्त कराया था।
इसके अलावा भावना पति-पत्नी की शिकायतों पर जांच कर मामलों का खुलासा करने में माहिर हैं। अब तक भावना ने इस तरह के कई केस सॉल्व किए हैं।
'खबरी' बनी दिल्ली की डिटेक्टिव
दिल्ली यूनिर्वसिटी से एमबीए की पढ़ाई पूरी कर जासूसी में अपने करियर शुरु करने वाली आकृति को देखकर आप भ्रम में पड़ जाएंगे कि ये लेडी जासूस है। शहर की सबसे युवा यह लेडी जासूस दिल्ली की नैनसी ड्रियु के नाम से भी जानी जाती है। नैनसी दिल्ली की सबसे युवा लेडी डिटेक्टिव हैं।
आकृति कहती हैं कि स्कूल और कॉलेज के दिनों में ही दोस्त उन्हें 'खबरी' कहकर बुलाते थे। किस लड़के का किस लड़की के साथ्ा अफेयर चल रहा है या कौन किसको पसंद करता है। ये सभी चीजें पता करने में बड़ा मजा आता था। इसलिए मैंने डिटेक्टिव बनना ही चुना।
इतना ही नहीं आकृति केन्द्रीय संसदीय मंत्रालय के अंतर्गत युवा पार्लियामेंट अवॉर्ड भी जीत चुकी है। साल 2006 में कॉलेज की पढ़ाई के दौरान आकृति ने अखबार में डिटेक्टिव का एक विज्ञापन देखा था। वहां परीक्षा पास करने के बाद आकृति ने एजेंसी ज्वाइन कर ली।
उसके बाद 2008 में एमबीए की परीक्षा पास करने के बाद आकृति ने दिल्ली में ही एक कंपनी में बतौर मार्केटिंग मैनेजर की नौकरी की, लेकिन वहां मन नहीं लगा और डिटेक्टिव की चाह आकृति को वापस खींच लाई। आज आकृति दिल्ली की लोकप्रिय डिटेक्टिव में से एक है।
25 सालों से है डिटेक्टिव
25 सालों से एनडीसीसी नामक डिटेक्टिव एजेंसी की हेड तारालिका लाहिरी काफी पुरानी डिटेक्टिव हैं। तारालिका पिछले 25 सालों से जासूसी का काम कर रही हैं। उनका मानना है कि जासूसी के क्षेत्र में सच्चाई काफी अहम है।
वे एसोसिएशन ऑफ प्राइवेट डिटेक्टिव एंड इनवेस्टिगेटर्स की सरकारी ब्रांच में हैं। इसके अतिरिक्त तारालिका कई केसों में स्टिंग ऑपरेशन, हिडिन कैमरे और ट्रैकिंग सिस्टम इत्यादि में मदद करती हैं।
इन महिलाओं की काबिलियत और इनकी बहादूरी समाज की किसी भी नारी के लिए प्रेरणा बनने के लिए काफी है। हालांकि अभी भी हमारे देश में जासूसी जैसे पेशे के लिए बड़ी संख्या में लड़कियों का आगे आना बाकी है।