दिल्ली सरकार के शिक्षा मंत्री मनीष सिसोदिया ने साफ किया है कि सरकारी जमीन पर बने निजी स्कूल बगैर सरकार की इजाजत के फीस नहीं बढ़ा सकते हैं। वहीं, जिन स्कूलों के पास पिछले वित्तीय वर्ष में वसूले गए शुल्क का पूरा खर्च नहीं हुआ है, वह भी फीस नहीं बढ़ाएंगे। चार अप्रैल को उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया ने हाईकोर्ट के आदेश को स्पष्ट करते हुए कहा था कि सरकारी जमीन पर बने 325 स्कूलों में से 242 स्कूल फीस नहीं बढ़ा पाएंगे और बचे स्कूलों के फीस बढ़ाने के प्रस्ताव की शिक्षा निदेशालय जांच कर रहा है।
वहीं, जांच में पाया गया है कि कुछ स्कूलों के पास करीब 40 करोड़ रुपये का अतिरेक है। शिक्षक शिकायत कर रहे हैं कि इससे उनकी सैलरी नहीं बढ़ सकेगी। इसे भ्रामक सूचना बताते हुए उन्होंने ने कहा कि दिल्ली सरकार शिक्षकों के साथ है। अक्तूबर 2017 में सरकार ने आदेश किया था कि निजी स्कूल 7वें वेतन आयोग के हिसाब से वेतन देंगे। स्कूलों को इसे मानना होगा।
उन्होंने ने कहा था कि 2017 का आदेश जारी करने के वक्त सरकार ने कहा था कि अतिरेक रकम रखने वाले स्कूल फीस नहीं बढ़ा पाएंगे। वहीं, जिस स्कूल ने पिछले वित्त वर्ष के शुल्क खर्च कर दी है, वह सरकार के पास फीस बढ़ाने को प्रस्ताव भेजेंगे। सरकारी मंजूरी के बाद ही फीस बढ़ोतरी संभव है।
सिसोदिया ने बताया था कि 325 में से 265 स्कूलों ने आवेदन किया, जबकि 60 ने अतिरेक रकम होने की बात मान ली थी। 265 स्कूलों के खातों की जांच शुरू होने पर 32 ने फीस बढ़ाने का प्रस्ताव वापस ले लिया था।