दिल्ली के निजी स्कूलों ने अभिभावकों को फीस बढ़ोतरी का झटका दिया है। निजी स्कूलों ने सातवें वेतन आयोग की सिफारिशें लागू करने के लिए फीस में 20-30 फीसदी की बढ़ोतरी कर दी है। दिसंबर की शुरुआत होते ही अभिभावकों के पास फीस वृद्धि को लेकर संदेश आने शुरू हो गए हैं।
उधर, अभिभावकों का आरोप है कि सरकार ने केवल ट्यूशन फीस में बढ़ोतरी की मंजूरी दी थी, जबकि स्कूल वार्षिक शुल्क व अन्य मदों में भी फीस बढ़ा कर वसूल रहे हैं। ऐसे में जहां कुछ अभिभावक बढ़ी फीस देने को मजबूर हैं तो कुछ स्कूलों के बाहर फीस बढ़ोतरी के खिलाफ प्रदर्शन शुरू हो गए हैं।
अक्तूबर में सातवें वेतन आयोग की सिफारिशें लागू करने के लिए शिक्षा निदेशालय ने निजी स्कूलों को दिशा-निर्देश जारी किए थे। इन निर्देशों में उन्हें ट्यूशन फीस बढ़ाने की मंजूरी दी गई थी। ट्यूशन फीस में यह बढ़ोतरी एक जनवरी 2016 से लागू की गई।
निदेशालय ने इसके लिए चार स्लैब तय किए थे। पहले स्लैब में ट्यूशन फीस में 7.5 फीसदी की बात कही गई थी, जो 1 जनवरी 2016 से मार्च 2016 तक के लिए होगा। दूसरा 1 अप्रैल 2016 से 3 जून 2017 तक। इस स्लैब में भी 7.5 फीसदी की बढ़ोतरी तय की गई है।
तीसरे व चौथे स्लैब में बढ़ोतरी 15-15 फीसदी तय की गई है, जिसके लिए 1 जुलाई 2017 से 3 नवंबर 2017 तक व चौथे स्लैब में 1 दिसंबर 2017 से 31 मार्च 2018 ट्यूशन फीस में 15 फीसदी की बढ़ोतरी शिक्षकों की सैलेरी के लिए तय की गई है। अब स्कूलों ने एरियर व फीस को लेना शुरू कर दिया है। उल्लेखनीय है कि बीते दो साल से स्कूलों को फीस में बढ़ोतरी करने की मंजूरी नहीं दी गई थी।