दिल्ली सरकार अगले सत्र में फिर से फीस बढ़ाने वाले निजी स्कूलों पर शिंकजा कसने की तैयारी में है। बिना सरकार की मंजूरी के फीस बढ़ाने वाले स्कूलों को मेमो के साथ-साथ कारण बताओ नोटिस भी जारी होंगे। सत्र शुरु होने से पहले स्कूलों को अनिवार्य रुप से फीस का ब्यौरा देना होगा। स्कूलों के खातों की जांच के बाद ही फीस बढ़ाने की अनुमति दिए जाने का निर्णय लिया जाएगा।
शिक्षा निदेशक ने हाल ही में कोर्डिनेशन कमेटी की बैठक में शिक्षा निदेशालय अधिकारियों को स्पष्ट कर दिया है कि दिल्ली स्कूल एजुकेशन एक्ट की धारा 17 (3) के अनुसार सभी निजी स्कूलों को अकादमिक सत्र शुरु होने से पहले फीस का ब्यौरा अनिवार्य रुप से देना होगा। भले ही कोई स्कूल किसी भी शुल्क को बढ़ाने की योजना बना रहा है या नहीं। जिला उपशिक्षा अधिकारी उन निजी स्कूलों को मेमो जारी करेंगो जो कि नियत समय के भीतर धारा 17(3) के तहत ब्यौरा जमा कराने में विफल रहते हैं।
यदि कुछ निजी स्कूल फीस विवरण जमा किए बिना शुल्क बढ़ाते हैं तो स्कूल को कारण बताओ नोटिस जारी किया जाए। नोटिस में कहा जाना चाहिए कि फीस वृद्धि को वापस लेने के लिए निर्देश क्यों जारी नहीं किए जाने चाहिए। यदि स्कूल धारा 17(3) केतहत फीस का ब्यौरा जमा कराता है तो उस जानकारी का अध्ययन किया जाना चाहिए। यदि किसी ब्यौरे में कमी पायी जाती है तो स्कूल को समय रहते बताया जाए। यदि कोई स्कूल फीस बढ़ाने का प्रस्ताव नहीं देता तो वह फीस नहीं बढ़ा सकता है। उल्लेखनीय है कि शिक्षा निदेशालय ने बीते तीन साल से स्कूलों पर फीस बढ़ाने को लेकर लगाम लगाई हुई है। इस कारण से अभिभावकों को राहत है।