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यूपी के प्राइवेट स्कूल में नहीं लगेगा ट्रांसपोर्ट चार्ज

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पूरे उत्तर प्रदेश में में अब कोई स्कूल ट्रांसपोर्ट चार्ज नहीं ले सकेगा। परिवहन मंत्री ने इसके आदेश जारी कर दिए हैं। अभी तक यह व्यवस्था कुछ मंडलों में लागू थी।
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स्कूलों को ट्रांसपोर्ट चार्ज न लेने के आदेश सभी आरटीओ, डीएम और कमिश्नर को भेज दिया है। अब स्कूल संचालक प्रदेश में कहीं पर भी ट्रांसपोर्ट चार्ज नहीं ले सकेंगे। स्कूल संचालक छात्रों से ट्रांसपोर्ट शुल्क वसूलते हैं।

फीस के साथ ही ट्रांसपोर्ट शुल्क के नाम पर भी मोटी धनराशि वसूली जाती है। प्रदेश में स्कूलों दो से दस हजार रुपये ट्रांसपोर्ट चार्ज ले रहे हैं। कई स्कूलों द्वारा इसकी रसीद अभिभावकों को दी जा रही है।
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चार्ज लेने पर बसों के परमिट हो जाएंगे कैंसिल

आरटीए (रीजनल ट्रांसपोर्ट अथॉरिटी) की बैठक में जून 2001 में इसकी रूलिंग तैयार की गई थी। तत्कालीन कमिश्नर दीपक और आरटीओ आरके उपाध्याय ने इसको नियमों में लागू कर दिया था। इसके तहत स्कूल वाहनों को टैक्स में छूट दी जाती है। इनसे वन टाइम टैक्स लेकर परमिट में शर्त लगाई जाती है कि ट्रांसपोर्ट चार्ज नहीं लिया जाएगा। अब यह व्यवस्था प्रदेश भर में लागू कर दी गई है।

आरटीओ मयंक ज्योति ने कहा कि स्कूल संचालकों को ट्रांसपोर्ट चार्ज लेने का अधिकार नहीं है। यदि कोई स्कूल ऐसा करता है तो उसके वाहनों के परमिट कैंसिल किए जाएंगे। इसके आदेश प्रवर्तन अफसरों को दिए गए हैं। ट्रांसपोर्ट चार्ज वसूलने की शिकायत अभिभावक आफिस में कर सकते हैं।

स्टेट ट्रांसपोर्ट कमिश्नर मानपाल सिंह वर्मा का कहना है कि अब कोई स्कूल संचालक ट्रांसपोर्ट शुल्क नहीं ले सकेगा। इसके आदेश जारी कर दिए गए हैं। स्कूल संचालकों को बस परमिट की शर्तों का पालन करना होगा।
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